Sunday, 3 May 2026

An Inspiring webinar with Shree Prachurya Pradhan ji

राष्ट्रीय एवं अंतर्राष्ट्रीय सम्मानों से सुशोभित शतरंज के अंतर्राष्ट्रीय विजेता, ओडिशा सरकार के वित्त विभाग में अंडर सेक्रेटरी पद पर कार्यरत प्राचुर्य प्रधान जी ऐसी प्रेरणास्रोत शख्सियत हैं  जिन्होने अटल जी की निम्न पंक्तियों को साकार किया है। बचपन से दृष्टीबाधित होने के बावजूद जीवन की प्रत्येक बाधाओं को सकारात्मक दृष्टी से देखा है। 

हार नही मानुंगा , रार नही ठानुंगा ।
काल से कपाल तक लिखता मिटाता हूँ ,गीत नया गाता हुँ।।

मित्रों, अनिता दिव्यांग कल्याणं समिती द्वारा आयोजित 3 मई को एक वेबिनार के माध्यम से प्राचुर्य जी से उनके जीवन के अनुभवों को सुनने का सौभाग्य प्राप्त हुआ। बच्चे को सफलता पूर्वक उसके सुनहरे भविष्य तक ले जाने वाले अभिभावक का सार्थक दृष्टीकोंण देखने को मिला।अनेक लोगों के लिये प्रेरणा स्रोत  प्राचुर्य जी का इंटरव्यू सुनकर लगा कि जीवन इतना भी कठिन नही होता जितना हम लोग परेशान होते हैं। जीवन में बाधाएं तो रोड पर आने वाले हडल के समान हैं, जिसको पार करते ही गति आसान हो जाती है। यदि मन में आगे बढने की दृणइच्छाशक्ति हो तो तनाव या शारीरिक दुर्बलताएं सबका समाधान है। विपरीत परिस्थितीयों में भी अपार संभावनाएं छुपी रहती हैं, मान लो तो हार है, ठान लो तो जीत। प्राचुर्य जी की बातें सुनकर हमें विवेकानंद जी की कही बात याद आ गई कि....

ब्रहमांड की सारी शक्तियां हममें हैं, वो हम ही हैं जो आँख पर हाँथ रख लेते हैं और रोते हैं कि कितना अंधकार है।

प्राचुर्य जी ने विवेकानंद जी के कथन को आत्मसात किया और धारा से अलग बहते हुए नया कीर्तिमान स्थापित किया। आर्ट के विषय से इतर कॉमर्स जैसे विषय को चुनना एवं कम्प्युटर  माध्यम से परिक्षा देकर आत्मनिर्भरता का सशक्त उदाहरण दिया है। पढाई के साथ शतरंज में विश्वस्तरिय मुकाम बनाना और नित नई विधाओं को सीखते हुए आगे बढना  ये सिखाता है कि,  
अपनी कमी के बारे में सोचकर दु:खी होने से अच्छा है, अपनी खूबी पर विचार करें क्योंकि हर अंधेरी रात के बाद उजली सुबह आती है। थोङी सी हिम्मत रखने से हर मुश्किल सुलझ जाती है।  

मित्रों, हम अपनी जिन्दगी की सभी घटनाओं पर नियंत्रण नही रख सकते, पर उनसे निपटने के लिये सकारात्मक सोच के साथ सही तरीका तो अपना ही सकते हैं। ये कहना अतिश्योक्ति न होगा कि सपने तो सब देखते हैं लेकिन सपने को साकार करके  प्राचुर्य जी ने एक नया पैगाम दिया है। 

ए.पी.जे. कलाम साहब के कथन से कलम को विराम देते हैं और सभी अभिभावकों एवं यूथ से निवेदन है कि इस इंटरव्यू को अवश्य सुने...

"Every day is a chance to begin again. Don't fous on the failures of yesterday. Start today with positive thoughts and expectations.'

प्राचुर्य जी के बारे में आप निचे दिये लिंक के माध्यम से उनकी जुबानी सुन सकते हैं।

Wednesday, 18 March 2026

अभिनन्दन नव वर्ष

हिंदु नववर्ष , गुढी पङवा और चैत्र नवरात्र मंगलमय रहे।

नव वर्ष की मंगल कामना, ईश्वरीय कृपा से फलीभूत हो जाए।

चहुंओर भँवरों की टोली गुनगुनाएं, कोकिल का पंचम स्वर गुंजे।

गौरैया बिना डरे घर में आयें, सबके आँगन में चीं चीं का स्वर गुंजे।

मोबाइल में सिमटा बचपन , खेल के मैदान में खिलखिलाए।

बच्चों का बचपन चहके,  खुशियां खेल खिलौने बन जायें।

हिन्दी भाषा के पंख लगा, विज्ञान शांति का शिखर छुएं।

कुछ राजनीति सुधरे ,कुछ जन-गण भी सुधरे।

पत्रकारिता  सच के पथ पर चले, अफवाहों की आंधी थमें।

छटें निराशा के कुहरे, युद्धों की ज्वाला बुझे, बुद्ध मुस्काएं।

शिक्षा के आँगन में कुछ हो परिवर्तन ऐसा,
 
पाठशाला की बगिया में बच्चों का मन रमे।

छोङ उदासी का दामन, अधरों पर मुस्कान रहे।


उपरोक्त मंगल अभिलाषा संग आप सभी पाठकों को नवरात्री, नववर्ष और गुढी पङवा की हार्दिक शुभकामनाएं 🙏

लिंक पर क्लिक करके पूर्व के लेख पढें






Friday, 13 March 2026

Inspiring Story ( Safe Pinki Mangal)

मंजिले भी जिद्दी है, रास्ते भी जिद्दी हैं।
देखते हैं कल क्या होगा , हौसले भी तो जिद्दी हैं।
मित्रों, आज हम एक ऐसी महिला से आपका परिचय करवाते हैं जिसका हौसला जिद्दी है। इंदौर की एक  गृहणी जो गांव के माहौल में पली बढी और 12-14 वर्ष की उम्र से ही  विभिन्न प्रकार के खाना बनाने की कोशिश करती।   सामुहिक परिवार में जब मां या भाभी रसोई में आने को मना कर देती तो अङोस-पङोस के घरों में जाकर उनके लिए कुछ नया खाना बनाने की कोशिश करती। पिंकी मंगल का यही शौक आज उनकी पहचान बन गई है। हालांकि ये पहचान बनना इतना आसान नही था। 18 वर्ष की उम्र में शादी हुई शादी के बाद रेटिनाइटिस पिगमेंटोसा बिमारी के कारण आंखो की रौशनी कम हुई और कुछ दिनों बाद सबकुछ दिखना बंद हो गया।

गौरतलब है कि, (रेटिनाइटिस पिगमेंटोसा एक दुर्लभ, आनुवंशिक नेत्र रोग है, जो रेटिना को नुकसान पहुंचाता है। यह रॉड और कोन कोशिकाओं के धीरे-धीरे खराब होने के कारण होती है, जिससे रात में कम दिखना, दृष्टि का दायरा कम होना और अंततः पूरी तरह दिखना बंद हो जाना।)

कहते हैं, अगर आप उन बातों और परिस्थितियों की वजह से चिंतित हो जाते हैं , जो आपके नियंत्रण में नही हैं, तो इसका परिणाम समय की बरबादी और भविष्य का पछतावा है। पिंकी ने अपनी वर्तमान स्थिती पर रोने की बजाय अपने शौक पर संजिदगी से काम करना शुरु कर दिया। सफर आसान नही था फिर भी अपने हौसले और परिवार के सहयोग से बिना किसी प्रशिक्षण से नये-नये व्यंजनों को बनाने लगी।

"इस दुनिया में असंभव कुछ भी नही है, हम वो सब कर सकते हैं जो हम सोच सकते हैं और हम वो सब सोच सकते हैं जो आज तक नही सोचे हैं"

एक दिन पिंकी को पता चला कि, गोल्डन आई शैफ नाम की संस्था दृष्टीबाधितों के लिए कुकिंग प्रतियोगिता का आयोजन करवाती है। ये संस्था अल्प दृष्टीबाधित और पूर्ण दृष्टीबाधित दो कैटेगरी में प्रतियोगिता का संचालन करती है। पिंकी ने इस प्रतियोगिता में पूर्णतः दृष्टीबाधिता की केटेगरी में हिस्सा लिया। पहली प्रतियोगिता में स्पाउट्स को नये तरिके से बनाया, अगले वर्ष इंदौरी उसलपोहा, फिर दाल बाटी चूरमा, मखाने की भेल और भुट्टे का किस ये सभी व्यंजन आयोजक की थीम के अनुसार बनाये गये। वर्ष 2021 से शुरु हुआ ये सफर प्रत्येक वर्ष पुरस्कार से सुसज्जित होता हुआ सोनी टीवी पर आयोजित मास्टर सैफ कुकिंग प्रतियोगिता तक पहुंच गया। 

8 जनवरी 2026 को सोनी टीवी पर आयोजित मास्टर सैफ कुकिंग प्रतियोगिता में 6 राउंड पास करती हुई पिंकी मंगल अंर्तराष्ट्रीय स्तर पर ऊपर के 25 लोगों में चयनित हुई। पिंकी की उपलब्धी पर देश के प्रतिष्ठित जज रनवीर बुरार, विकास खन्ना एवं कुनाल कपूर ने बहुत तारीफ की।

अगले राउंड में तंदूरी पकवान बनाना था, परंतु तंदूर पर काम पहले न करने की वजह से समय पर पकवान नही बना पाई। सामान्य दृष्टीसक्षम लोगों के बीच एक अकेली दृष्टीबाधित महिला का 7 राउंड तक पहुंचना भी एक महत्वपूर्ण उपलब्धी है। इतिहास लिखने के लिये कलम की नही हौसले की जरूरत होती है। ये कहना अतिश्योक्ति न होगा कि भविष्य में पिंकी मंगल अपने हौसले से अनेक कुकिंग प्रतियोगिता को जीतकर इतिहास रचेगी।

ए पी जे कलाम साहब का कथन हैः- "हम सबमें समान प्रतिभा नही है लेकिन हम सबके लिए समान अवसर है हमारी प्रतिभा को विकसित करने के लिए"

जिंदगी की खूबसूरती इसी पर है कि आप उसे कैसे देखते हैं। पिंकी अपने हुनर के बलपर आज समाज में एक विशेष पहचान बना चुकी है। अब तक आठ पुरस्कार प्राप्त करके कई लोगों के लिए प्रेरणास्रोत है। गांव में पली-बङी, शिक्षा का लाभ ज्यादा नहीं मिला परंतु उसने अपने शौक को जिवन में आगे बढने का रास्ता बना लिया है।
 
जीतुंगी मैं यह मेरा वादा है, कोशिश मेरी सबसे ज्यादा है। 
हिम्मत भी टूटे तो भी नही रुकुंगी, मजबूत मेरा इरादा है।

पिंकी, अपने इन्ही इरादों से आगे बढती रहो। हमसब आपके उज्जवल भविष्य की कामना करते हैं और आपके ज़ज्बे का अभिनंदन करते हैं। निरंतर नये-नये व्यंजन बनाते हुए एक नया इतिहास लिखो, ढेर सारी शुभकामनाएं। ये कहना अतिश्योक्ति न होगा कि, सफलता का आशिर्वाद केवल उन्हे ही मिलता है, जिन्होने कभी संघर्ष के कदमों को स्पर्श किया हो।


एक निवेदन दिये गये विडियो लिंक को अवश्य देखें और ब्लॉग पर कमेंट के माध्यम से पिंकी मंगल का हौसला अवश्य बढायें



सोनी टीवी का विडियो 

धन्यवाद 
जयहिंद वंदे मातरम्






 

Saturday, 7 March 2026

अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस की हार्दिक शुभकामनाएं

मजबूत हौसला, बुलंद इरादा, हिम्मत का परिधान पहन और लाज के गहने से सजी आज की नारी अनेक चुनौतियों के बावजूद आगे बढने का जज़बा लिए कहती है....

"खुशबु बनकर गुलों में उङा करते हैं, धुआं बनकर पर्वतों से उङा करते हैं, ये कैंचियां खाक हमें रोकेंगी, हम परों से नही हौसलों से उङा करते हैं।" 

आज की नारी अबला नही सबला है ये विश्वास बढा है। विकास के हर क्षेत्र में अपना परचम लहरा रही नारी को चंद असमाजिक तत्वों का खौफ नही क्योंकि आत्मसम्मान के साहस ने दस्तक दे दी है।  मर्यादा का भान लिये जिम्मेदारियों की चादर ओढ नई सोच का आसमान छुने निकल पङी है।


"हम भी दरिया हैं हमें अपना हुनर मालूम है, जिस तरफ भी चल पङेंगे रास्ता बन जायेगा।

आप सबको महिला दिवस की हार्दिक शुभकामना के साथ कहना चाहेंगे कि,

एक दिन क्या हर पल है तुम्हारा, ये आसमां तुम्हारा है उङान भरकर देखो सारा जहाँ है तुम्हारा।


नोटः-  अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस 2026 (8 मार्च) का मुख्य थीम है 'गिव टू गेन' (Give to Gain)। यह थीम इस विचार को पुष्ट करती है कि जब  महिलाएं  सशक्त बनती हैं, तो  एक अधिक समृद्ध और संतुलित दुनिया का निर्माण होता है।