नव वर्ष की मंगल कामना, ईश्वरीय कृपा से फलीभूत हो जाए।
चहुंओर भँवरों की टोली गुनगुनाएं, कोकिल का पंचम स्वर गुंजे।
गौरैया बिना डरे घर में आयें, सबके आँगन में चीं चीं का स्वर गुंजे।
मोबाइल में सिमटा बचपन , खेल के मैदान में खिलखिलाए।
बच्चों का बचपन चहके, खुशियां खेल खिलौने बन जायें।
हिन्दी भाषा के पंख लगा, विज्ञान शांति का शिखर छुएं।
कुछ राजनीति सुधरे ,कुछ जन-गण भी सुधरे।
पत्रकारिता सच के पथ पर चले, अफवाहों की आंधी थमें।
छटें निराशा के कुहरे, युद्धों की ज्वाला बुझे, बुद्ध मुस्काएं।
शिक्षा के आँगन में कुछ हो परिवर्तन ऐसा,
पाठशाला की बगिया में बच्चों का मन रमे।
छोङ उदासी का दामन, अधरों पर मुस्कान रहे।
उपरोक्त मंगल अभिलाषा संग आप सभी पाठकों को नवरात्री, नववर्ष और गुढी पङवा की हार्दिक शुभकामनाएं 🙏
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