Monday, 5 October 2015

असुविधा के लिये खेद है

मित्रों, शारीरिक अस्वस्थता के कारण अक्टुबर माह में कोई भी लेख पोस्ट नही कर पायेंगे
न्यवाद

अनिता शर्मा

Thursday, 1 October 2015

मिलनसार राष्ट्रपति ए.पी.जे.अब्दुल्ल कलाम



हम सबके आदर्श ए.पी.जे. अब्दुल्ल कलाम साहब का सम्पूर्ण जीवन हम सबके लिये ज्ञान का भंडार है। उनकी हर जिम्मेदारी हम सभी को नई दिशा प्रदान करती है। राष्ट्रपति के रूप में कलाम साहब को सबसे मिलनसार राष्ट्रपति कहा जाता है। अपने राष्ट्रपति के कार्यकाल में उन्होने कई एतिहासिक कार्य किये जो अविस्मरणिय हैं। उन्होने अपनी इस जिम्मेदारी को भारत 2020 विजन का मंच बनाते हुए एक नई चुनौति को स्वीकार किया था।  कलाम साहब का उद्देश्य था कि राष्ट्रपति भवन जनता की पहुँच के लिये सुलभ हो। 

कलाम साहब ने राष्ट्रपतिभवन में सबसे पहले ई गर्वनेस का आगाज किया। अर्थात इलेक्ट्रॉनिक्स शासन प्रणाली की शुरुवात किये। जिसके तहत सभी पत्र, फाइलें और दस्तावेजों को स्कैन करके उन्हे इलेक्ट्रॉनिक रूप में बदला जाने लगा तथा पहचान के लिये प्रत्येक पर बार कोड अंकित  किया गया। ई-गर्वनेस लागु होनेपर केवल पाँच घंटे में चालिस अर्जियों का निपटारा होने लगा जबकि पहले बीस अर्जियों को निपटाने में सात दिन लग जाते थे। 

राज्यों और केन्द्रशासित प्रदेशों के सांसदों के साथ राष्ट्रपति भवन में सुबह के नाश्ते पर उनके राज्यों का सीधा हाल जानना , राष्ट्रपति कलाम साहब की प्रारंभिक दिनों की महत्वपूर्ण गतिविधी थी। देश के विकास के तीन आधारों , 1- विकसित भारत की संकल्पना, 2- उस राज्य या यूनियन टेरिटरी की सम्पदा, 3- उस राज्य की विशिष्ट क्षमताओं पर जोर दिया गया तथा उस राज्य के सांसदों को सर्वे के आधार पॉवर पॉइंट के जरिये समझाया गया । कलाम साहब की पहली मिटिंग बिहार के सांसदों के साथ हुई थी। उनका मानना था कि राष्ट्रपति भवन ही एक मात्र ऐसा स्थान है जहाँ दलगत मतान्तर खत्म हो जाता है और प्रत्येक सांसद राष्ट्रहित को एक सम्पूर्ण ईकाइ के रूप में देखता है। 

कलाम साहब अपनी पुस्तक टर्निग प्वॉइंट में लिखते हैं कि, "मुझे राष्ट्रपति के रूप में दोनों सदनों को दस से अधिक बार संबोधित करने का मौका मिला। जहाँ मैं देशहित के अपने विचारों को उन्हे समझा सका। 2007 में जब देश 1857 के संर्घष की 150वीं ज्यंति मना रहा था, तब कलाम साहब ने अपने भाष्ण में कहा था कि, सच्ची स्वतंत्रता और स्वाधीनता के लिये अभी हमारा आन्दोलन पूरा नही हुआ है। प्रिय सांसदों और विधायकों, समय आ गया है कि हम सब नये संक्लप और नेतृत्व के साथ देश को सम्पन्न, एकताबंद्ध, सामजस्यपूर्ण, विपुल एंव समृद्ध करते हुए इसे सुरक्षित राष्ट्र बनायें जो अतिक्रमण तथा सीमा पार के घुसपैठ के लिये अभैद हो।" कलाम साहब के कार्यकाल में वर्ष 2003 और 2005 में राष्ट्रपति भवन में आयोजित राज्यपालों के सम्मेलनों का महत्वपूर्ण योगदान रहा। 

कलाम साहब के राष्ट्रपति कार्यकाल की अन्य प्रेरणास्रोत बातों के साथ मंगलवार को पुनः मिलते हैं।
गाँधी ज्यंति और लाल बहादुर शास्त्री जी के जन्मदिन पर अंनत बधाईयां। 

गाँधी जी एवं लाल बहादुर शास्त्री जी पर मेरे पूर्व के लेख पढने के लिये लिंक पर क्लिक करें 
धन्यवाद








Sunday, 13 September 2015

भारत माता के भाल की बिन्दी है हिन्दी

मित्रों, ये बहुत खुशी की बात है कि दसवां विश्व हिन्दी सम्मेलन भारत के ह्द्रय कहे जाने वाले राज्य मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में सम्पन्न हुआ। मेरा प्रश्न ये है कि क्या हम एक दिन या दिवस मनाकर हिन्दी को विश्व भाषा बना सकते हैं?

जबकी हिन्दी भारत माता के भाल की बिन्दी है, भारत के दिल की धङकन है हिन्दी। 

अतः मित्रों हमें ये प्रण करते हुए कि हिंदी को विश्व की सबसे प्रमुख भाषा बनायेंगे । इसके लिये हर पल हिंदी को अपनी अभिव्यक्ति का माध्यम बनायेंगे। 


एक अपील, हिंदी को लेकर जो मेरे विचार हैं वो पूर्व के लेख में अवश्य पढें। 



Wednesday, 9 September 2015

ए.पी.जे.कलाम और ह्वीलर द्वीप



मित्रों, अभी हाल में ही उड़ीसा सरकार ने ह्वीलर द्वीप का नाम हम सबके प्रिय अब्दुल कलाम साहब के नाम कर दिया है। उनके सम्मान में ये कदम बहुत प्रशंसनिय है। ह्वीलर द्वीप से कलाम साहब का क्या नाता रहा है?  इसके बारे में आप सबसे कलाम साहब के संस्मरण को साझां करना चाहेंगे, जो उन्होने अपनी पुस्तक टर्निंग प्वाइंट में उल्लेखित किया है। 

मिसाइल मैन अब्दुल कलाम साहब अपनी पुस्तक में  जिक्र करते हैं कि, 'ये उन दिनों की बात है जब पृथ्वी मिसाइल का सफल परिक्षण हुआ था।इसी के साथ सेना की एक और जरूरत सामने आई जिसमें उन्हे जमीनी क्षेत्र के लिये एक आधुनिक यंत्र की आवश्यकता थी। जिसके लिये हम लोग जिस मरुस्थली क्षेत्र में अपने परिक्षण कर रहे थे, वह सुरक्षा व अन्य कारणों से उपयुक्त नही था। हमें अपने इस काम के लिये पूर्वी तटिय क्षेत्र के किसी निर्जन द्वीप की जरूरत थी।


भू जलीय नक्शे में हमें उड़ीसा तट पर कुछ निर्जन द्वीप नजर आये। वहाँ भू भागों की सम्भावना थी। हम अपनी टीम जिसमें  डॉ़ एस.के.सलवन तथा डॉ. वी.के. सारस्वत शामिल थे। धमरा से एक नौका किराये पर ली गई और हम सब द्वीप की तलाश में निकल पड़े। नक्शे पर इन द्वीपों के संकेत 'लौंग ह्वीलर', 'कोकोनट ह्विलर' और 'स्मॉल ह्विलर' के नाम से लिखे हुए थे। टीम ने एक कमपास( दिशासूचक यंत्र) लिया और यात्रा पर निकल पड़े। टीम रास्ता भटक गई उसे ह्वीलर द्वीप नही मिला लेकिन सौभाग्य से , उन्हे कुछ मछुआरे अपनी नौकाओं में दिखे। उनसे रास्ता पूछा गया। उन मछुआरों को ह्वीलर द्वीप का  तो पता नही था लेकिन उन्होने चन्द्रचूड़ नाम के एक द्वीप का जिक्र किया। मछुआरों ने सोचा कि ये लोग इसी द्वीप का पता पूछ रहे हैं। उन्होने चंद्रचूड़ द्वीप का पता बता दिया। उनके बताये हुए  रास्ते से टीम चंद्रचूड़ पहुंची और बाद में पता चला कि वही स्मॉल द्वीप है और वहाँ हमारी जरूरत भर जगह पर्याप्त है।

उस द्वीप को पाने के लिये हमें उड़िसा नौकरशाही का सामना करना पड़ा। यह जरूरी हुआ कि इसके लिये उड़िसा के तत्कालीन (1993) मुख्यमंत्री से राजनितिक निर्णय पाया जाये। उस समय शक्ति सम्पन्न नेता बीजू पटनायक मुख्यमंत्री थे। उनके कार्यालय से संकेत मिल रहा था कि वह द्वीप किन्ही कारणों से उपलब्ध नही हो पायेगा। खैर हमारी विनय स्वरूप हमें बीजू पटनायक से भेंट करने का अवसर मिला। जब हम उनके कार्यालय में पहुँचे तो फाइल उनके सामने रखी हुई थी। उन्होने कहा, 'कलाम, मैने ये पाँचो द्वीप डी.आर.डी.ओ. को बिना किसी किमत के देने का फैसला लिया है, लेकिन मैं इस फाइल पर अपनी स्वकृति हस्ताक्षर तभी करुंगा जब तुम्हारी ओर से  एक वादा किया जायेगा। उन्होने मेरा हाँथ अपने हाँथ में थाम कर कहा, ' तुम्हे एक मिसाइल ऐसी बनानी पड़ेगी जो दूर के दुश्मनों से भी हमारी रक्षा कर सके'। मैने कहा, 'सर, हम जरूर इसपर काम करेंगे। मैने तुरंत रक्षा मंत्री को सूचना दी। मुख्यमंत्री के हस्ताक्षर होने के बाद हमें स्मॉल द्वीप मिल गया।
  
पाठकों इस प्रकार कलाम साहब के अनुरोध पर ये द्वीप डी.आर.डी.ओ. को रॉकेट प्रक्षेपण के लिये उपलब्ध हो सका। उनके महत्वपूर्ण प्रयासों से आज ये द्वीप विश्व के महान प्रक्षेपात्रों में शामिल है।

2 दिसंबर 2014 को परमाणु सक्षम अग्नी IV मिसाइल का परिक्षण उङीसा के ह्वीलर द्वीप के एकीकृत परिक्षंण रेंज से किया गया था। नि:संदेह ह्विलर द्वीप का नाम 'कलाम द्वीप' हो जाने से देश के युवाओं और वैज्ञानिकों को प्रेरणा मिलेगी। 

प्रिय पाठकों, अब्दुल्ल कलाम साहब   के सफर से जुड़े कुछ और संस्मरण आप सबसे इस महिने हर हफ्ते सांझा करेंगे। 

धन्यवाद

Tuesday, 1 September 2015

जिन्दगी की राह को आंतरिक ऊर्जा से रौशन करें।


मित्रों, हम सबके भीतर अजस्र ऊर्जा शक्ति छिपी पङी है जिसे न तो हम 
पहचान पाते हैं और ना ही उसका समुचित उपयोग कर पाते हैं। जिस तरह से एक छोटे से बीज में एक बङा वृक्ष बनने की हर क्षमता होती है लेकिन कई बार सही पोषण न मिलने से वो अपने प्रारंभकाल में ही दम तोङ देता है। उसी तरह मनुष्य में भी अपार संभावनाये हैं जो कुछ तो वातारण के कारण पल्लवित नही हो पाती, तो कुछ उसके स्वयं के आलसी व्यवहार के कारण। अक्सर ये भी देखा जाता है कि अपार ऊर्जा के बावजूद कई लोग असफलता के डर से आगे बढने की हिम्मत नही करते। दर असल कमी संसार में नही है कमी तो हमारे मन में है। यदि हम चाहें तो बिगङे काम भी बना सकते हैं।

मित्रों, बात सिर्फ कैरियर की नही है। हम जिस समाज में रहते हैं वहाँ नाना प्रकार के रिश्ते और अभिलाषायें भी विद्यमान हैं। जिनमें कुछ सकारात्मक तो कुछ नकारात्मक परिवेश की रचना करती हैं। ऐसे में कई बार हम लोग रिश्ते निभाने में भी अपनी अच्छाईयों और अपनी सकारात्मक निःश्चल भावनाओं का आकलन सही तरीके से नही करते।यदि किसी ने कहा कि आप गलत हो तो उसे ही आधार मानकर खुद को कोसने लगते हैं कि, हम तो रिश्ता निभा नही सकते। जबकि ये बहुत बङा सच होता है कि, आपके प्रति लोगों का आकलन  उनके नजरिये से होता है न की आपके नजरिये से, फिर भी नकारात्मक वातावरण  हमारी शुद्ध भावनाओं को आघात कर देते हैं। 

ऐसे में हमें हमारी शुद्ध भावनात्मक ऊर्जा पर विश्वास होना चाहिए। बाहर से दिखने में सभी मनुष्य एक समान दिखते हैं परंतु हर किसी में कोई न कोई न्यूक्लियर शक्ती छुपी हुई है जो सृजन भी कर सकती है और विध्वंस भी कर सकती है। ये तो उसके उपयोग पर निर्भर है। आज विडंबना है ये कि हम अपनी क्षमता को अन्य से कम आंकते हैं और सफलता अर्जित करने वालों को भाग्यशाली कहकर अपने मन को  भी प्रताङित करते हैं। सच तो ये है कि, जिनके दिल में कुछ कर गुजरने के अरमान हैं वो बङे कारनामें कर सकते हैं, फिर चाहे रिश्तों का ताना-बाना हो या कैरियर की ऊँचाइयां सभी में सफल हो सकते हैं। 


स्वामी विवेकानंद जी ने कहा है कि,  ब्रह्मांड की सारी शक्तियां पहले से हमारी हैं। वो हम हैं जो अपनी आँखों पर हाथ रख लेते हैं और फिर रोते हैं कि कितना अंधकार है। 

छोटे से परमाणु में भी अजस्र शक्ति छुपी होती है। जीवन के हर क्षेत्र में अपनी क्षमता को पहचानते हुए आगे बढने में ही सच्ची सफलता है। अतः मित्रों, अपने अन्दर की शक्ति पर विश्वास करते हुए निडर होकर जिन्दगी की राह को आंतरिक ऊर्जा से रौशन करें। 
















Friday, 28 August 2015

रक्षाबंधन की हार्दिक बधाई



       
 
                        
                          तोड़े से भी ना टूटे जो
                          ये ऐसा मन -बंधन है
                       इस बंधन को सारी दुनिया
                           कहती रक्षाबंधन है


                    रक्षाबंधन की हार्दिक बधाई
                                                                   
A Raksha Bandhan article

धन्यवाद



Monday, 24 August 2015

भूल होना मानवीय स्वभाव है


हमारा जीवन अनेक रंगो से रंगा हुआ है। कहीं राग है तो कहीं द्वेष है, कहीं सक्रियता तो कहीं आलस्य है, तो कहीं आवेश है तो कहीं विक्षोभ। इन तरह-तरह के मानसिक आवेगों का तुफान तभी थमता है, जब हमारा मन स्थिर रहता है। यदि विचार करें तो आज की फास्ट लाइफ में मन भी बहुत फास्ट दौङता है, ऐसे में गलतियों की संभावना भी बढ जाती है। दुनिया में शायद ही कोई ऐसा व्यक्ति होगा, जिसने अपने जीवन में कोई भी भूल न की हो। प्रायः आवेश या उत्तेजना में हमसे भूल हो जाती है क्योंकि इनके आवेग में मन अस्थिर व अशांत हो जाता है और बुद्धी ठीक तरह से काम नही करती। बाल्याकाल से लेकर जीवन अंत तक कभी न कभी कुछ न कुछ गङबङ हो ही जाती है। परंतु भूलों के विषय में सोचकर अपने व्यक्तित्व को कुंठित कर लेना किसी भी दृष्टी से समझदारी नही है।बल्की भूल का भान होने पर उसे सुधारना एक सकारात्मक पहल है, जिसे प्रायश्चित कहते है। सच तो ये है कि पश्चाताप स्वयं को सुधारने का एक प्रयास होता है। दुनिया में बहुत से ऐसे लोग भी होते हैं जो गलतियों को छिपाते हैं और स्वंय को सही साबित करते हैं। अंग्रेजी में एक कहावत है कि, "to err is human" अर्थात गलती इंसान से होती है। ये भी सच है कि, गलतियों से ही सीखकर कई बङे-बङे आविष्कार भी हुए हैं और हम सब भी अपने-अपने जीवन में हुई गलतियों से सबक लेकर कामयाब भी हुए हैं। 

"Mistake are the stepping stones to learning" 

ऐसा कहा जाता है कि, गलती करना मनुष्य की नैसर्गिक और मौलिक पहचान है। सामाजिक ढाँचा और नाना प्रकार की विचारधारा के साथ हम सब जीवन यापन करते हुए अनेक रिश्तों से जुङे होते हैं, जहाँ विचारों की भिन्नता के कारण कई बार छोटी-छोटी अनबन और गलत फहमी हो जाती है। लेकिन यही छोटी-छोटी गलतियाँ कब बङी हो जाती हैं पता ही नही चलता जबकि हम सब ये जानते हैं कि, सच्चे रिश्तों की खूबसूरती एक दूसरे की गलतियों को बर्दाश्त करने में है क्योंकि बिना कमी के  इंसान तलाश करेंगे तो अकेले ही रह जायेंगे। किसी ने सच ही कहा है कि, गलती स्वीकार करने में कभी देर नही करनी चाहिये क्योंकि सफर जितना लंबा होगा वापसी भी उतनी ही मुश्किल होगी। 

"Mistake is a single page of life but relation is a complete book. So don't lose a full book for a single page." 

प्रेंचन्द जी ने अपने एक उपन्यास में कहा था कि, पश्चाताप के कङुए फल कभी न कभी सभी को चखने पङते हैं। सच ही तो है दोस्तों, जिंदगी हैं तो भूलें होती रहेंगी, गलतियाँ भी होगी क्योंकि भूल होना मानवीय स्वभाव का अभिन्न अंग है। लेकिन इन गलतियों और भूलों को मन में बसा लेना समाधान नही है क्योंकि इंसान गलती करके इतना दुखी नही होता बल्की उन गलतियों के बारे में बार-बार सोचकर दुःखी होता है इसलिये दोस्तों,
गलतियों की क्षमा माँगते हुए और गलतियों से सबक लेते हुए आगे बढना ही जिंदगी का सकारात्मक फलसफा है। 

"We all make Mistake. Nobody is perfect. Live it, Learn from it and Move on"  :)  

  


















Friday, 14 August 2015

स्वतंत्रता दिवस की शुभकामनायें

भारत के स्वतंत्रता आंदोलन में हम सबके प्यारे तिरंगे का भी
विशेष महत्व है। अमर शहीदों के गौरव की पहचान लिये तिरंगे में
गीता, कुरान, बाइबिल तथा गुरु ग्रंथ साहब का पैगाम है। भारत का सिरमौर तिरंगा सभ्यता, संस्कृति तथा न्याय का सम्मान है। अनेकता में एकता के संदेश के साथ तिंरगे ने सभी को एक सूत्र में बाँधा है। आजादी के मतवाले, इसके नेतृत्व में अनेक क्रान्तीकारी आंदोलनों की सफलता का आगाज करते हुए जय हिन्द का घोष करते थे। लाल किले की प्राचीर से आज भी हम सब एकता के प्रतीक तिरंगे को सम्मान और आदर से लहराते हैं। विश्व जगत को शांति का संदेश देता ये तिरंगा विवेकानन्द जी का अभियान है।

राष्ट्रपीता महात्मा गाँधी ने कहा था कि, "हमारे लिये यह अनिवार्य होगा कि हम भारतीय मुस्लिम, ईसाइ, ज्यूस, पारसी और अन्य सभी जिनके लिये भारत एक घर है, एक ही ध्वज को मान्यता दें और इसके लिये मर मिटें।"

पिंगली वैकैया द्वारा सुशोभित किये तिरंगे के तीन रंग (केसरिया, सफदे और हरा) त्याग और बलिदान, शांती एवं समृद्धी के प्रतीक हैं। अनेक देश भक्तों की शहादत का अभिमान लिये, भव्य हिमगिरी का अमर वरदान है। ऐसे विश्व विजयी तिरंगे को शत-शत बार प्रणाम है।
          इतनी सी बात हवाओं को बताये रखना,
           रौशनी होगी चिरागों को जलाए रखना,
        लहु देकर जिसकी हिफाजत की है देश भक्तों ने,
          ऐसे तिरंगे को दिल में हमेशा बसाये रखना।
    स्वतंत्रता दिवस की हार्दिक शुभकामनाएं
           जय हिन्द जय भारत

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वंदे मातरम्
आजादी के 66 वर्षों बाद भी क्या हम आजाद हैं ?

Thursday, 30 July 2015

गुरु पर्व की शुभकामनाएं





    गुरू देव ही सर्व समर्थ परमात्मा हैं और शिष्य के लिये उनसा उपकारी कोई नही
गुरु पूर्णिमा नित मनाये,  उपकारी गुरु सा नही, 
सदा नवाएं माथ । 

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Wednesday, 29 July 2015

डॉ. ए.पी.जे. कलाम साहब को भावांजली

स्वपनदृिष्टा और युवाओं के आइकॉन, देश ही नही वरन दुनिया के महान वैज्ञानिकों में प्रतिष्ठित हम सबके प्यारे मिशाइल मैन, ए.पी.जे. कलाम साहब आज भले ही हम लोगों के बीच नही हैं किन्तु, उनके संदेश उनके कार्य सदैव हम सबको प्रेरणा देते रहेंगे। भारत रत्न कलाम साहब का सम्पूर्ण जीवन ही  प्रेरणादायी है। एक राष्ट्रपति के अलावा वह एक आम इन्सान के तौर पर सभी युवाओं की पहली पसंद और प्रेरक हैं। उनकी बातेंउनका व्यक्तित्वउनकी पहचान न केवल एक राष्ट्रपति के रूप में हैं बल्कि जब भी लोग खुद को कमजोर महसूस करते हैं कलाम का नाम ही उनके लिए प्रेरणा बन जाता है। उनके द्वारा कहे गये कुछ  संदेशों को याद करते हुए  श्रद्धासुमन अर्पित करते हैं और प्रार्थना करते हैं कि उनकी आत्मा को शांति मिले तथा भारत के प्रति उनका सपना साकार हो, 2020 विजन से भारत विश्व में नई ऊँचाइयों को हासिल करे। 


"सपना वो नही जो हम नींद में देखते हैं, सपना वो है जो हमें नींद न आने दे।" 

"महान सपने देखने वालों के सपने अवश्य पूरे होते हैं।" 


"यदि हम स्वतंत्र नही हैं तो कोई भी हमारा आदर नही करेगा।" 


"मनुष्य को मुश्किलों का सामना करना आना चाहिये, क्योंकि सफलता के लिये ये जरूरी है।" 


"भगवान उन्ही की मदद करते हैं जो कठिन परिश्रम करते हैं ये सिद्धान्त स्पष्ट होना चाहिये।" 


"अलग ढंग से सोचने का साहस करो, अज्ञात पथ पर चलने का साहस करो, असंभव को खोजने का साहस करो और समस्याओं को जीतो और सफल बनो। ये वो महान गुणं हैं जिनकी दिशा में तुम अवश्य काम करो।" 


"हमें हार नही माननी चाहिये और समस्याओं को खुद पर हावी नही होने देना चाहिये।" 


"अपने मिशन में कामयाब होने के लिये आपको अपने लक्ष्य के प्रति एकाग्रचित होना चाहिये।" 

धर्म और जाति से परे डॉ. ए.पी.जे. कलाम साहब के सभी संदेश उनके जीवन के अनुभव हैं, उनके कथन उनके कर्म का आइना हैं। प्रकुति से जिन्दगी की सीख लेने वाले कलाम साहब का कहना है कि, 


"Waves are my inspiration. Not because they rise and fall, but because each time they fall, they rise, again and again." 

कलाम साहब के संदेश सदैव हम सबका मार्ग प्रशस्त करेंगे। रेत में भी अपने कदमो के निशान छोङने वाले अद्भुत व्यक्तित्व के धनी युगपुरूष कलाम साहब को भावांजली, ऊँ शान्ति 



कलाम साहब से सम्बन्धित पूर्व की पोस्ट पढें -