Sunday, 28 February 2016

Very memorable Get together :)

Hello Friends
Greetings from voice for blind,


मित्रों, मुलाकातें तो बहुत लोगों की कई लोगों से होती हैं लेकिन कुछ मुलाकातें यादगार होती हैं, ऐसी यादों को आप सबसे Share करना चाहते हैं। पिछले दिनों मेरा इंदौर जाना हुआ, वहाँ कई दृष्टीबाधित बच्चे मुझसे मिलना चाह रहे थे। लिहाजा समय अभाव के कारण मैने सबको एक जगह ही बुला लिया था। उन बच्चों की मिलने की इच्छा देखकर मेरी खुशी में तो चार चांद लग गये क्योंकि वहां वो बच्चे भी आये जो मुझे जानते थे लेकिन हम उनको नही जानते थे। उनको अपने दोस्तों से पता चल गया था कि हम मिलने वाले हैं सबसे। हालांकी जिस जगह पर हम मिलने का प्रोग्राम रखे थे वो इंदौर के पवित्र स्थलों में से एक, रंणजीत हनुमान मंदिर में था।



पूर्व निर्धारित समय के अनुसार सभी बच्चे दोपहर एक बजे पहुँच गये। सबसे पहले हम लोगों ने गंणेश वंदना की जिसको स्टेट बैंक में कार्यरत अर्जुन ने सुनाई तद्पश्चात हम सब मिलकर हनुमान चालिसा तथा राम स्तुति का पाठ किये। वहीं पर भोजन की व्यवस्था भी थी अतः हम सब हनुमान जी का प्रसाद ग्रहण किये।


 यहाँ कई नये ऐसे साथी भी आये थे जो वाइस फॉर ब्लाइंड के साथ मिलकर काम करना चाहते हैं। लिहाजा उन सब लोगों का भी परिचय होनहार बच्चों से हुआ। हमारे साथी करन जो दृष्टीबाधित बच्चों को परिक्षा के दौरान सहलेखक का इंतजाम करते हैं, सुनिता मेम जो ग्रुप के माध्यम से बच्चों को अंग्रेजी में प्रशिक्षित कर रही हैं तथा मेरे सहयोगी सहलेखक नवदीप,अंकित, अतुल और शारदा बत्रा ने व्यवस्था को सुचारू करने में भरपूर सहयोग दिया।

 इस मिलन समारोह में बच्चों ने  बताया कि, परिक्षा एवं पढाई के दौरान उन्हे किन-किन दिक्कतों का सामना करना पङता है। जिसे उसदिन वहाँ उपस्थित हमारे विशेष पत्रकार मेहमान जो, फ्री प्रेस , हिन्दुस्तान टाइम्स तथा पत्रिका से आये थे, उन्होने ध्यान से सुना तथा अपने-अपने समाचारपत्रों में जगह भी दी। मेरे लिये ये खुशी का पल इसलिये भी था कि, मिडिया हो या समाज अपने स्तर पर सहयोग कर रहा है। 


लेकिन फिरभी उन बच्चों को जिसतरह की सहायता मिलनी चाहिये वो पूरी तरह से मिल नही पा रही है। बहुत से टेलेंटेड बच्चे हैं जिनको आज नौकरी की तलाश है। शिक्षा पूर्ण करने के बाद यदि उन्हे रोजगार मिल जाये तो उनके जीवन का अंधेरा दूर हो जायेगा और समाज में सम्मान से जीवन यापन कर सकते हैं। आज मेरे कई विद्यार्थी बैंक में एवं विद्यालयों में कार्यरत हैं। परन्तु अभी भी अनेक प्रतिभावान बच्चे ऐसे हैं जिन्हे रोजगार की तलाश है। 

अतः मित्रों, मेरा आप सबसे निवेदन है कि, दृष्टीबाधित बच्चों की योग्यतानुसार उन्हे काम उपलब्ध कराने का प्रयास करें। आपका उनके प्रति किया गया प्रयास उन्हे हौसला देगा और उनकी जिंदगी को नई सुबह देगा। 

धन्यवाद ः) 

Monday, 15 February 2016

उत्साह ; सफलता का बल है (The real secret to success is enthusiasm)


जीवन में आगे बढने की तम्मना हर किसी में अंकुरित होती है। इस धरती पर शायद ही कोई ऐसा हो जो कामयाबी के सपने न देखता हो। परंतु कामयाबी हर किसी को नही मिलती क्योंकि कहीं न कहीं व्यक्ति की कार्य के प्रति उदासीनता राह में सबसे बङी अङचन होती है। वहीं, जो व्यक्ति पूरे उत्साह से अपने लक्ष्य के प्रति क्रियाशील रहता है वो लक्ष्य हासिल करने में सफल होता है।  उत्साह से परिपूर्ण व्यक्ति किसी भी समस्या का समाधान कर सकता है। उत्साह की हर नई सुबह नये पैगाम लाती है। जब हमसब बिते दिनों के बारे में सब भूलकर अपने नये दिन से मिलते हैं तो ऐसा आभास होता है कि,  मानो सारी शक्तियां स्वयं में विद्यमान है और हम अपने लक्ष्य को सहज ही प्राप्त कर सकते हैं।

स्वामी विवेकानंद जी ने भी कहा है कि, ब्रह्मांड की सारी शक्तियां पहले से हमारी हैं। वो हम ही हैं जो अपने आंखों हाँथ रख लेते हैं और कहते हैं कि कितना अंधकार है। 

उत्साह तो गुलाब की तरह कोमल है, लेकिन इसकी ऊर्जा शक्ति विद्युत तरंग की भांति तन-मन को ऊर्जावान बनाती है। वाल्मीकि रामायण में भी लिखा है – उत्साह से बढकर कोई बल नही है। उत्साही व्यक्ति के लिये जगत में कोई वस्तु दुर्लभ नही है। इस बात का प्रत्यक्ष प्रमाण हमसब अपने जीवन में देख सकते हैं। जब हम अपने मन में कार्य करने की प्रबल इच्छा रखते हैं तब ऐसी शक्ति हमारे अंदर आ जाती है कि, हमारा मन एवं दिमाग कहता है कि मुझे ये कार्य करना है और इस उत्साह के बल पर ही हम बङे से बङे काम भी क्षंणभर में करने के लिए तत्पर हो जाते हैं। उत्साह से व्यक्ति में साहस का संचार होता है। ये हमें जिंदादिल बनाए रखता है। उत्साह तो सार्थक जीवन की ऊर्जा है। उत्साह में धैर्य, संयम और सहनशील जैसे गुंण होते हैं जिसकी वजह से क्रोध को नियंत्रण करने वाला मानवीय गुंण का संचार होता है।

यदि हम दैनिक जीवन में छोटी-छोटी बातों का ध्यान रखें तो स्वंय में उत्साह का संचार कर सकते हैं, जैसे -   रोज सेवेरे नये संकल्प लें और उसे पूरा करने का पुरजोर प्रयास करें। प्रातःकाल सभी प्रियजन को नमस्कार, जय श्री कृष्णा, गुडमार्निंग जैसे अभिवादन को मुस्कान के साथ अभिव्यक्त करें। अपने कार्यक्षेत्र पर सभी से खुश होकर पूरे उत्साह से मिलें। आशावादी विचारों का माहौल बनायें क्योंकि सकारात्मक व्यक्ति सदा दूसरों में भी पॉजिटिव ऊर्जा का संचार करता है। रोज सुबह आकाश की ओर देखिये पक्षी कितने उत्साह के साथ उङते हैं। धरती पर भी फूलों की खिली हुई मुस्कान को महसूस करें, ये वो एहसास हैं जो हमारे मन में नए उत्साह का संचार करते हैं। नये दिन के साथ नई शक्ति और नये विचार मन में आते हैं जो नये विकास की कहानी लिखते हैं। उत्साहित प्रयास से वो सब कुछ हमें मिलता है जो हमसे संबंधित है । अगर हमारे अन्दर उसे प्राप्त करने की क्षमता है

Enthusiasm is the yeast that makes your hopes shine to the stars

उत्साह के लिये प्रत्येक अवस्था एक समान है। जिस तरह गुलाब कांटो में भी खिलकर दुनिया को महकाता है। वह मुरझाने पर भी अपनी सुगंध नही त्यागता, उसी तरह हम सबको भी जिंदगी की कठोर एवं कांटो भरी डगर पर अपने उत्साह के साथ हर पल आगे बढना है। अपने लक्ष्य को उत्साह की मुस्कान के साथ पूरा करना है।


एक अनुरोधः- यदि आपके पास हिन्दी में कोई प्रेरणादायी लेख या सकारात्मक जानकारी है, जो आप हमारे साथ Share करना चाहते हैं तो कृपया आप अपनी फोटो के साथ E-Mail करें 
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धन्यवाद 




Thursday, 11 February 2016

माँ सरस्वती! वरदान दो।।


ऊँ गं गणपतये नमः , ऊँ ऐं ह्मी क्लीं महा सरस्वती देव्यै नमः 

विद्या की देवी माँ सरस्वती का विशेष पर्व है बसंत पंचमी जिसे हम सब श्रद्धा का भाव लिये उल्लास के साथ मनाते हैं। हंसवाहिनी, विद्यादायिनी माँ सरस्वती की कृपा से जीवन के सभी अंधकार, पल भर में दूर हो जाते हैं। धार्मिक मान्यता के अनुसार माँ सरस्वती का प्रादुर्भाव ब्रह्मा जी के मुख से हुआ है। विद्या एवं वांणी की देवी माँ सरस्वती की पूजा का आह्वान सबसे पहले श्री कृष्ण जी ने किया था। श्वेत पुष्प और मोती के आभुषणों से सुसज्जित माँ सरस्वती के हाँथ में विणा विद्यमान हैं, जिसके सुर समस्त जगत में ज्ञान और सन्मार्ग का प्रकाश आलोकित करते हैं। बसंत की बहार लिये प्रगती का आधार हो माँ। हरित धरा पर सृष्टी का श्रृंगार तुम्ही से है। ज्ञान का भण्डार तथा सुरों को मिठास देने वाली माँ सरस्वती, हम सब आपके चरणों में वंदन करते हैं नमन करते हैं और प्रार्थना करते हैं :-  - - - -


मां शारदे! हंसासिनी!
वागीश! वीणावादिनी!
मुझको अगम स्वर-ज्ञान दो।।
माँ सरस्वती! वरदान दो।।

निष्काम हो मन कामना,
मेरी सफल हो साधना,
नव गति, नई लय तान दो।
विद्या, विनय, बल दान दो।
माँ सरस्वती! वरदान दो।।


यह विश्व ही परिवार हो,
सबके लिए सम प्यार हो,
'आदेश' लक्ष्य महान दो।
माँ सरस्वती! वरदान दो।।

Tuesday, 2 February 2016

स्वच्छ भारत की कल्पना और हमारी सोच


मित्रो,  स्वच्छ और साफ सुथरे भारत की कल्पना आज एक अहम मुद्दा है और स्वस्थ भारत के लिये आवश्यक सोच भी है, जिसे प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी जी अपने एवं सरकार की योजनाओं के माध्यम से आगे बढाने का कार्य कर रहे हैं। ये भी सच है कि साफ सुंदर जगह पर रहना हर कोई पसंद करता है, फिरभी सड़कों पर ये कचरे का ढेर, सड़कों पर बहता नालियों का पानी, कचरे और बदबुदार टॉयलेट के साथ चलती ट्रेन या मॉल तथा सिनेमा हॉल में  यहाँ-वहाँ बिखरे कचरे यही बंया कर रहे हैं कि, स्वच्छ भारत का सपना अभी मिलों दूर है। इसकी सबसे बङी वजह है, स्वच्छता के प्रति हम सबकी उदासीनता। 

अभी हम बनारस से होकर आये हैं, जहाँ से स्वच्छ भारत का अभियान शुरु हुआ है। बनारस का मंजर अभी भी कचरों की ढेरियों तथा पान की पिको से लहलहा रहा है। गंदगी का आलम देखकर लगा कि चिराग तले अँधेरा और मन में एक प्रश्न भी उठा कि हाखिर ये कचरा आता कहाँ से है? विपक्ष की कोई चाल तो नही सरकार को बदनाम करने की ! तभी पिछे घर से एक महिला डस्टबीन लेकर निकली और सड़क पर कचरा फेंक कर चली गई।घर की छत पर हम खड़े हुए सोच ही रहे थे कि कहीं ये विपक्षी पार्टी की तो नही है किन्तु उसके घर पर तो भा.ज.पा. का झंडा लगा हुआ था। सड़क पर आते-जाते लोग कहीं भी पान की पीक थूक रहे थे। ये नजारा देख मेरे प्रश्न का उत्तर मिल गया।

मित्रों, कहीं भी कचरा या गंदगी हम लोग ही फैलाते हैं और सरकार को गालियां देते हैं। जब नगर निगम की गाड़ियां आती हैं तो उसे कचरा देने में आलस करते हैं और उसके जाने के बाद अपने ही घर के सामने कचरे का अंबार लगाते हैं। हम अपने अधिकारों के लिये खूब हल्ला मचाते हैं किन्तु जिम्मेदारियों से मुहँ मोड़ लेते हैं। विचार किजीये किसी के घर के सामने या मोहल्ले में कोई दूसरा गंदगी नही फैलाता बल्की वहीं के निवासी अपने आस-पास कचरे का साम्राज्य स्थापित करते हैं और अपने द्वारा फैलाई गंदगी का ठीकरा सरकार पर फोङते हैं।   ट्रेन के टॉयलेट में पानी बराबर रहता है फिरभी टॉयलेट यूज करने के बाद पानी नही डालते लिहाजा बदबु चारो तरफ फैलती है और तो और चिप्स एवं अन्य नाश्ते का पैकिंग कचरा कहीं भी फेंक देते हैं और गंदगी देखकर रेलमंत्रालय को खरी खोटी सुनाते हैं। ट्रेन हो या बस और शहर हो या गॉव हर जगह गंदगी हम लोग ही फैलाते हैं। आज हम पाश्चात्य सभ्यता के कपड़े पहनते हैं। ब्रांडेड चीजों से खुदको अपडेट करते हुए बेइंतहा इतराते हैं  लेकिन वहाँ के जागरुक नागरिकों की तरह शहर को स्वच्छ रखने की पहल खुद से नही करते। पढे लिखे शिक्षित लोग भी कहीं भी कचरा फेंक देते हैं। कहने को पॉश कॉलोनी होती है किन्तु उस कॉलोनी के पार्क में वहीं के बच्चे तथा रहवासी चिप्स के खाली पैकट फेंक देते है जबकि पार्क मे डस्टबीन रखा होता है। जब हम बङे ही स्वच्छता के प्रति जागरुक नही हैं तो बच्चों को क्या सीख देंगे। 

अपने भारत में भी एक ऐसा राज्य है सिक्किम जहाँ साफ सफाई का आलम ये है कि, उसकी तुलना फ्रांस से की जाती है। वहाँ की सरकार ने कानून में सख्ती बरती हुई है तथा वहाँ के नागरिकों में भी जागरुकता है जिसकी वजह से सिक्किम भारत का ऐसा राज्य बन गया है जहाँ स्मोकिंग भी हर जगह कोई नही कर सकता। उसके लिये स्मोकिंग जोन बने हुए हैं। कहने का आशय यही है कि यदि हम सब अपनी व्यक्तिगत जिम्मेदारी समझते हुए अपने घर की तरह अपने मोहल्ले को भी साफ सुथरा रखें तो पूरा भारत साफ सुथरा और सुंदर बन जायेगा।

अपने देश में एक बहुत बड़ा वर्ग ऐसा भी है जो डंडे से और फाइन के डरके कारण ही सही कार्य करता है। ऐसे लोगों को सख्त कानून के तहत इस कार्य हेतु समझाना पङेगा।  मेरा एक सुझाव है सरकार को कि, हर शहर के पार्षद को ये निर्देश मिले कि यदि उनके एरिया में गदंगी मिली तो उनको जुर्माना भरना होगा और मोहल्ले या कॉलोनी में भी साफ सफाई न रहने पर उस जगह के सभी रहवासियों को जुर्माना भरना होगा। ऐसा करने से भी साफ सफाई रह सकती है।  अक्सर चलती बस से लोग कचरा फेंक देते हैं या थूक देते हैं ऐसे में बस चालक और कंडक्टर पर फाइन लगाना चाहिये फाइन के डर से वो अपने यात्रियों पर नियंत्रण रखेगा। उदाहरण के तौर पर बताना चाहेंगे कि, पिछले साल हम लोग अंडमान गये थे वहाँ ट्राइवल एरिया मे फोटो खींचना मना है यदि किसी ने खींचा तो उसको तो केवल 10,000 का फाइन है लेकिन ड्राइवर को 6 साल की सजा और ड्राइविंग लाइसेंस जब्त कर लेने का प्रावधान है। इससे ये होता है कि हर गाडी़ का ड्राइवर सजग होता है कि उसके वाहन में बैठा यात्री फोटो न खींच सके। इस तरह की पहल को स्वच्छता के अभियान में भी अमल करने की आवश्यकता है। 

स्वच्छ भारत का असर हम सभी के स्वास्थ पर भी पड़ेगा। स्वच्छ और स्वस्थ भारत से निःसंदेह आर्थिक स्थिती में भी मजबूती आयेगी। गंदगी से उपजी बिमारियों से निज़ात मिलेगा। अतः हम सबको इस स्वच्छता के अभियान में जागरुक नागरिक की तरह योगदान देना चाहिये। जिससे सिर्फ सिक्किम ही नही सम्पूर्ण भारत स्वच्छता का प्रतीक बन जाये। स्वयं की जागरुकता अपने वतन के लिये सच्ची देश भक्ति होगी। आज हम सबका नारा हो, साफ सुथरा हो देश हमारा। 

धन्यवाद
जय हिन्द 

Monday, 25 January 2016

26 जनवरी विशेष, राष्ट्रिय गौरव का प्रतीक हमारा गणतंत्र



हमारा गणतंत्र, हमारी सांस्कृतिक और राष्ट्रिय गौरव का प्रतीक है। उत्तर वैदिक युग में ही हमने गणतंत्र-व्यवस्था विकसित कर ली थी। ऋगवेद तथा अथर्ववेद में आई स्तुतियों तथा मैगस्थनीज की बातों से भी यही सिद्ध होता है कि,  भारत के प्राचीन में भी गंणराज्य थे। डॉ. राजेन्द्र प्रसाद ने गणतंत्रीय व्यवस्था को भारतीय संस्कृति का अभिन्न अंग बताया है। हम सब भारतवासियों को अपनी  पुरातन संस्कृति और वर्तमान गणतांत्रिक व्यवस्था पर गर्व है। आज देश में जहाँ निराशा के कारण विद्यमान हैं तो, आशा के भी उजाले चारों दिशाओं में अपना उजाला रौशन कर रहे हैं। राष्ट्रभाव की भावना का आज भी शंखनाद हो रहा है। अपनी गौरवपूर्ण गणतांत्रिक धरोहर के तले हमें अपनी अभिव्यक्ति का अधिकार है। आज हम सब विकास के नये सोपान पर चढ रहे हैं। सामाजिक चेतना की भी कोई कमी नही है। गंणतंत्र ने हमें लोकतंत्र जैसी व्यवस्था के साथ समता, स्वतंत्रता और भाई-चारे जैसे मूल्य दिये हैं। अनेकाता में एकता का प्रतीक हमारा भारत विश्व में इकलौता देश है जिसे इस पृथ्वी का स्वर्ग कहना अतिश्योक्ति न होगा। सौहार्द के रंग में रंगा हमारा देश सहिंष्णुता के विचारो से बना है। इस देश की मिट्टी में हर धर्म, जाति और समुदायों का अंकुरण है। जयशंकर प्रसाद ने तो कहा है कि, अरुण यह मधुमय देश हमारा, जहाँ पहुँच अनजान क्षितिज को मिलता एक सहारा। हम सब को एक सूत्र में पिरोने वाला हमारा गंणतंत्र राष्ट्रीयता की पहचान है। गणतंत्र उत्सव जन गण मन का राष्ट्रीय उल्लास है। उल्लास के इस राष्ट्रीय पर्व को हम सब मिलकर मनायें और प्रण करें कि, भारत की सांस्कृतिक गणतांत्रिक विचारों की रक्षा पूरे तन मन से करते हुए भारत को गौरव के शिखर पर ले जायेंगे। इसी के साथ आप सबको, राष्ट्रीय पर्व गंणतंत्र दिवस की  हार्दिक बधाई।
जय भारत   
वंदे मातरम् और 26 जनवरी पर निबंध को पढने के लिये लिंक पर क्लिक करेंः-  वन्दे मातरम्

26 January special an essay










Saturday, 23 January 2016

बालिका दिवस विशेष, आसमां तुम्हारा है

कुछ कर गुजरने के लिये मौसम नही मन चाहिये, यही सोच हैं आज की बेटियों की। सामने ढेरों चुनौतियां फिर भी दिल में आगे बढने का जज़बा कहता है, "खुशबु बनकर गुलों में उङा करते हैं, धुआं बनकर पर्वतों से उङा करते हैं, ये कैंचियां खाक हमें रोकेंगी, हम परों से नही हौसलों से उङा करते हैं।" 

देश की आन बान शान की रक्षा में तत्पर भारत की मान है बेटियां। विकास के हर क्षेत्र में आज बेटियां अपना परचम लहरा रही हैं।भारतीय संस्कृति की चादर ओढे आज की बेटियो पर हर माँ-बाप को नाज है। इस सृष्टी का आधार हैं बेटियां। कुदरत का उपहार हैं बेटियां। चंद असमाजिक तत्वों का खौफ नही क्योंकि आत्मसम्मान के साहस ने दस्तक दे दी है। मर्यादा का भान लिये  नई सोच का आसमान छुने निकल पङी हैं।  उनका कहना है कि, "हम भी दरिया हैं हमें अपना हुनर मालूम है, जिस तरफ भी चल पङेंगे रास्ता बन जायेगा।" 

बालिका दिवस के इस शुभ अवसर पर देश की समस्त बेटियों को कोटी-कोटी बधाई। एक दिन क्या हर पल है तुम्हारा, ये आसमां तुम्हारा है  उङान भरकर देखो; जो मिल गया उससे बेहतर तलाश करो, कतरे में भी छुपा है समंदर तलाश करो, हांथो की लकीरें भी यही कहती हैं  कोशिश से अपना मुक्कदर तलाश करो क्योंकि  जुगनू कभी रौशनी के मोहताज नही होते। सारा जहाँ है तुम्हारा हौसले की उङान भरो। 

बालिका दिवस के उपलक्ष्य पर अपने पाठकों से अपील करते हैं कि; नये दौर को अपनाओं, पॉजिटिव सोच का पंख लगाओ क्योंकि बेटी है तो कल है, वरना विराना पल है। 

Beti hai to kal hai

जय भारत
धन्यवाद
अनिता शर्मा



Friday, 22 January 2016

सुभाष चंद्र बोस, भारत माता के साहसी सेनापती

भारत माता की आजादी के लिये अपना सर्वस्य न्योछावर करने वाले महान स्वतंत्रता सेनानी सुभाष चंद्र बोस का बलिदान अमर है। 23 जनवरी 1897 को जन्मे सुभाष के आदर्श विवेकानंद जी थे। 20 सितंबर 1920 को आई. सी. सी. की सफल परिक्षा पास करने के बावजूद सुभाष चंद्र बोस ने 22 अप्रैल 1921 को इस महत्वपूर्ण पद से त्यागपत्र दे दिया था। इतिहास में ये दिन अमिट है क्योंकि इतने उच्च पद का त्याग करके भारत माता को नमन करने वाले वो पहले व्यक्ति थे। भारत की माटी के सच्चे प्रहरी सुभाष से अंग्रेज अधिकारी भी डरते थे। मातृ भूमी के प्रति उनके मन में अपार श्रद्धा थी। ऐसा उनका एक प्रसंग आप सबसे सांझा कर रहे हैं। 

एकबार एक अंग्रेज पुलिस अधिकारी सुभाष चंद्र बोस को गिरफ्तार करने उनके घर गया। वहाँ उनके कमरे में प्रवेश करने के साथ ही चौक गया उसने विस्मित नेत्रों से कमरे को देखा बड़ा साधारण सा कमरा था कहीं कोई सजावट नहीं थी। फर्श पर एक कंबल बिछा था जिस पर सुभाष बाबु बैठे थे। आस पास कुछ पुस्तकें थी और लिखने के लिए एक पेन रखा हुआ था।  उनके हाथ में एक पुस्तक थी, संभवत: यह स्वामी विवेकानंद जी के पत्रों का संकलन था, जिसे स्वामी विवेकानंद जी ने अपने शिष्यों अपने मित्रों तथा गुरु भाइयों को समय-समय पर लिखा था। इस पत्रावली में देश प्रेम की ऐसी आग थी जिसकी गरमाहट से सुभाष का देशप्रेम ह्रदय, आजादी की चिंगारी लिये धधक रहा था। दीवार के पास एक चौकी थी जिस पर फूलों की सजावट के बीच एक चांदी की डिबिया रखी थी। यह चौकी पूजा की बेदी थी। इतना साधारण कमरा देख अंग्रेज अधिकारी के आर्श्चय का ठिकाना न था। उसने कहा मिस्टर सुभाष मेरे पास तुम्हारी गिरफ्तारी के लिए वारंट है। उसने सुभाष की तरफ विचित्र नजरों से देखते हुए कहा; सुभाष तुम क्या हो सकता थे और क्या हो गए। 

मित्रों, ये अंग्रेज अधिकारी सुभाष चंद्र बोस को इंग्लैंड के दिनों से परिचित था। उसे अभी तक 20 सितंबर 1920 का वह दिन यह था, जब सुभाष चंद्र बोस आई. सी. एस. की परिक्षा में प्रथम श्रेंणी में सफल हुए थे। सफल छात्रों के सूची में उनका चौथा स्थान था; जबकि अंग्रेजी कंपोजीशन में उन्हे प्रथम स्थान मिला था। सुभाष बाबु ने, अंग्रेजों को उनकी भाषा में धूल चटा दी थी। समाचार पत्रों में इसकी बड़ी चर्चा हुई थी उसके कुछ ही महीने बाद फिर से समाचार पत्रों ने अपने मुखपृष्ठ पर एक समाचार प्रकाशित किया जब उन्होंने आई.सी.एस. के पद से त्याग पत्र दे दिया था।  

अंग्रेज अधिकारी ग्रिफिथ की बात सुनकर सुभाष चंद्र बोस ने हंसते हुए  कहा; "ठीक कहा तुमने, मैं गुलाम हो सकता था, लेकिन आज मैं अपने देश की स्वाधीनता का सजग सिपाही हूं"।

अंग्रेज अधिकारी कुछ खिसियाते हुए बोला मुझे इसी समय तुम्हें गिरफ्तार करना है।  इस पर सुभाष फिर से हंसते हुए बोले अवश्य जो तुम्हें आदेश दिया गया है उसका पालन करो। इस पर वह अधिकारी पुनः बोला मुझे तुम्हारे कमरे की तलाशी लेनी है। अंग्रेज अधिकारी  ने हर चीज कमरे की उलट पलट कर देखी कागजों में उसे कुछ भी आपत्तिजनक ना मिला तब उसने चौकी पर रखी चांदी की डिबिया खोली इसमें कुछ चूर्ण  जैसा था उसने पूछा यह क्या है?  सुभाष ने कहा;  "इसमें मेरे देश की मिट्टी है"
अंग्रेज अधिकारी ने उत्सुकता से पूछा, लेकिन यहां पर इस डिबिया में और चौकी के ऊपर फूलों की सजावट के बीच इस को रखने का क्या प्रयोजन है? सुभाष चंद्र बोस ने उत्तर दिया,  "मैं हर रोज अपने देश की मिट्टी की पूजा करता हूं  देश की स्वाधीनता की अपने उद्देश्य का स्मरण करता हूं" 

अंग्रेज अधिकारी ने कहा मिस्टर सुभाष तुम पागल हो गए हो अन्यथा कोई मिट्टी की भी पूजा करता है।  उसने कहा तुम्हे गिरफ्तार होने का कोई दुःख नही है। सुभाष चंद्र बोस ने कहा, "कष्ट और त्याग तो स्वाराज की नींव हैं इसी पर स्वराज की कल्पना साकार होगी।" 

इस गिरफ्तारी के बाद सुभाष चंद्र बोस को मांडले जेल में रखा गया था। मांडले जेल पहुँचकर सुभाष आनंदित हो गये क्योंकि मांडले जेल, लोकमान्य बालगंगाधर , भगत सिंह तथा लाला लाजपत राय जैसे महान देशभक्तों का साक्षी रहा है। ये तो तपस्वी क्रांतिकारियों की तपोभूमि थी। 

2 मई को सुभाष बाबु ने दिलिप कुमार राय को पत्र लिखकर कहा था कि, 
"यहाँ रहकर मेरे विचारों में परिवर्तन होने लगा है। इस जेल का वातावरण मेरे मस्तिष्क में दार्शनिक विचार उत्पन्न करता है। मैं महसूस कर सकता हूँ कि लोकमान्य बाल गंगाधर तिलक जी ने, गीता रहस्य की रचना बहुत ही शांति और परंम संतोष के साथ की होगी।"

नेताजी सुभाष चंद्र बोस इस जेल में सबके प्रिय नेता बन गये थे। उनका व्यक्तित्व एक प्रकाश पुंज की तरह था। ये कहना अतिश्योक्ति न होगा कि, नेताजी सुभाष चंद्र बोस आज भी राष्ट्र के लिये प्रकाश का अमर स्रोत हैं।भारत की स्वतंत्रता के जांबाज़ सिपाही सु्भाष चंद्र बोस को उनके जन्मदिन पर नमन करते हैं और उनके संदेश के साथ कलम को विराम देते हैं। "राष्ट्रवाद, मानव जाति के उच्चतम् आर्दशों सत्यम शिवम् सुन्दरम् से प्रेरित है।" 
जय हिंद

नेताजी के जिवन परिचय के लिये लिंक पर क्लिक करेंः- 


Wednesday, 20 January 2016

आतंकवाद कभी भी अच्छा या बुरा नही होता

आतंकवाद सम्पूर्ण विश्व के लिये एक ऐसा परमाणु बम है, जिससे समस्त सजीव जगत का विनाश हो रहा है। आतंकवाद कभी भी अच्छा या बुरा नही होता, आतंकवाद का न कोई धर्म है, न कोई मज़हब। आतंकवाद तो वो ज़हर है जो इन्सानियत का सबसे बङा दुश्मन है।  सभी धर्म या मज़हब में मानवता को सर्वोपरी माना गया है फिर भी आतंकवाद के प्रचारक इसे जेहाद (धर्म) की लङाई बताकर भोले-भाले लोगों को दिशाभ्रमित कर रहे हैं। आज हम सब आतंकवाद रूपी एक ऐसे वायरस की चपेट में आगये हैं जिसको बच्चों की मासुमियत भी नज़र नही आती। विश्व के भविष्य को ही निस्तेनापूत करने वाला ये आतंकवाद रूपी बम सिर्फ दहशत का ही प्रतीक नही है बल्की समस्त सृष्टी को ही खत्म करने वाला प्रलय है। इस जलजले से सभी इंसानियत के रहनुमाओं को मिलकर लङना होगा। 
अटलबिहारी वाजपेये जी ने कहा था कि, "किसी भी मुल्क को आतंकवाद के खिलाफ वैश्विक साझेदारी का हिस्सा होने का ढोंग नही करना चाहिये। जबकि वो आतंकवाद को बढाने, उकसाने और प्रयोजित करने में लगा हो।" 

अमेरीका का 9/11 आतंकी हमला या मुम्बई के  26/11 हमले को लोग भूल ही नही पाये थे कि, पेशावर के स्कूल में छोटे-छोटे मासूमों की चीख ने इन्सानियत के पहरेदारों को सोचने पर मजबूर कर दिया। आतंकवाद का न कोई अपना है और न ही कोई अपना देश क्योंकि ये तो जिस देश में पनाह लेता है उसे ही डस लेता है। आज विश्व के सभी देश इस कोबरे के चपेट में आ चुके हैं। कङी से कङी सुरक्षा में भी इसकी पहुँच हैं। जिसका परिणाम है, पेरिस और रूस  का आतंकवादी हमला। हाल ही में भारत में पठानकोट हमला और अभी पेशावर के विश्वविद्यालय पर हमाला यही दिखाता है कि, आतंकवाद के खिलाफ जो भी बोलेगा उसको आतंकवाद के रहनुमा नष्ट करने में तनिक भी देरी नही कर रहे हैं। 

आज समय की माँग है कि, संयुक्तराष्ट्र संघ को गुड और बैड टेरिरज्म का राग न अलापते हुए, इस तरह की शैतानी ताकतों को जङ से नष्ट करने के लिये कोई सख्त कदम उठाना होगा। विश्व के भविष्य को सुरक्षित रखने के लिये सभी देशों को मिलकर, आतांकवादियों के नापाक मनसुबों को नष्ट करना होगा। चंद पैसों के लालच में अपना ईमान बेचने वाले लोगों को अपनी  देशप्रेम की भावना को जिवंत करना है। 

दिया किसी के भी घर का बुझे सच्ची इंसानियत का ह्रदय करुणा से भर जाता है क्योंकि उसके लिये सभी बच्चे एकसमान होते हैं। इंसानियत की नेकदिली को देश, धर्म या जाति की दिवारें रोक नही सकती हैं। आज सभी इंसानी ताकतों को एक होना है और इस धरा पर से आतंकवाद रूपी राक्षस को धराशायी करना है।  मानवता के प्रतिनिधियों को मिलकर विश्व कल्यांण का संकल्प करते हुए, सर्वे भवन्तु सुखिनः का आह्वान करना होगा। 

आतंकवाद नफरत है ना पालो इसे,
दिलों में खलिश है निकालो इसे,
ना तेरा ना मेरा, ना इसका ना उसका,
ये सृष्टी है सबकी बचालो इसे। 

Monday, 18 January 2016

मल्हार मिडिया की नई सोच को सलाम


Voice for blind क्लब की ओर से मल्हार मिडिया को पहली सालगिरह पर हार्दिक शुभकामनाएं। मल्हार मिडिया की संस्थापक ममता यादव को बहुत-बहुत बधाई। ममता जी ने मल्हार मिडिया की पहली सालगिरह को राष्ट्र की गौरव बेटियों को समर्पित किया। ममता जी ने उन बच्चियों को सम्मानित किया जिनका सफर आसान नही था, लेकिन उनके हौसले की उङान ने उन्हे आज सफलता के सोपान पर खङा कर दिया है। मल्हार मिडिया ने इन बच्चियों को सम्मानित करके एक नई शुरुवात की है, जो समाज  में सकारात्मक संदेश देगा जिससे समाज में दृष्टीबाधितों के प्रति सहयोग की भावाना का विस्तार होगा।  इन बच्चों को दया नही समाज का परिवार की तरह साथ चाहिये  क्योंकि विकलांगता अभिशाप नही है। ममता यादव जी आपकी सोच का अभिनंदन करते हैं।  रजनी, मोनिका,सोनु और अंकिता का कहना है कि, आँधियों को जिद्द है जहाँ बिजली गिराने की हमें भी जिद्द है वहाँ आशियां बसाने की। अपनी इसी जिद्द को लेकर ये बच्चियाँ दृष्टीबाधिता के बावजूद अपनी योगयता के बल पर आज आत्मनिर्भर हैं तथा अपने सपनों को साकार कर रही हैं। 

रजनी, मोनिका,सोनु और अंकिता संक्षिप्त परिचय के लिये लिंक पर क्लिक करेंः-   मल्हार मीडिया की अवार्डी अद्भुत प्रतिभायें

Be kind & help others


हम कितने भी आधुनिक हो जायें फिर भी हम समाज और उसके सहयोग की अहमियत को समझते हैं क्योंकि समाज से परे एकांकी रहकर तो व्यक्तिगत जीवन का भी विकास संभव नही है। धरती पर जीवन की बनावट ही कुछ ऐसी है कि मनुष्य अपने आप में सिमट कर नही रह सकता। विकास की यात्रा हो या जिवन यापन की जरूरतें सब के सहयोग से ही पूर्ण होती है। 
Read more:-  सहयोग की भावना मानवता की प्रतीक है


जिवन में पग-पग पर अनेक चुनौतियों का सामना करते हुए आज कई दृष्टीबाधित लोग अपने हौसले की रौशनी से स्वंय के साथ अनेक लोगों की जिंदगी को प्रकाशित कर रहे हैं। बेमिशाल जिंदादिली से कई लोगों को आत्मनिर्भर बना रहे हैं। कुदरत ने सभी को कुछ न कुछ कमियाँ दी हैं तो कुछ न कुछ प्रतिभाएं भी दी है। 

Read more:-    अंधेरी दुनिया में हौसले की रौशनी


विकास के इस दौर में आप सबसे अनुरोध है कि, हम सब मिलकर दृष्टीबाधित बच्चों के लिये मानवीय भावना से ओत-प्रोत एक ऐसे आसमान की रचना करें, जिसकी छाँव में दृष्टीबाधित बच्चे सकारात्मक सहयोग और स्वयं के प्रयास से आत्मनिर्भर बन सकें। 
Read more:-  दृष्टीबाधिता अभिशाप नही है


Friends, शिक्षा वो हथियार है जिसके माध्यम से आत्म सम्मान और आत्मनिर्भरता के साथ जीवन यापन किया जा सकता है। वाइस फॉर ब्लाइंड क्लब का उद्देश्य भी है कि, Visual Impaired Students को शिक्षा के माध्यम से आत्मनिर्भर बनाना। Read more:-
आपका थोङा सा समय किसी को आत्म सम्मान से जीने का अवसर दे सकता है

समस्त विश्व में दृष्टीबाधित अर्थात अन्धापन का कारणकई प्रकार की बिमारियाँअस्वछता तथा उदासीनता है। भारत में सर्व प्रथम दृष्टीबाधिता का कारण रुबैला वायरस अथवा जर्मन मिजल्स होता था।
Read more:-  दृष्टीबाधिता के कारण Cause of blindness

दोस्तों आप सबके सहयोग को देखकर हमें, हमारी भारतीय संस्कृती पर और अधिक गर्व होता है। सच कहें तो किसी के लिए भी मन में सहयोग की भावना, हमारी भारतीय संस्कृती की पहचान है और हममें से कई लोगों ने ये अनुभव भी किया होगा कि किसी की सहायता करके एक रुहानी खुशी का एहसास होता है। सहयोग की भावना हमारे विकास का आधार भी है।
Read more:-  Thanks for Co-Operation

धन्यवाद
अनिता शर्मा