Wednesday, 15 June 2016

दिव्यांग साथियों के संग सुखद सफर


2011 में कुछ दृष्टीबाधित बालिकाओं को पढाने के साथ मेरे इस सफर की शुरुवात हुई। उनके मन में आगे बढने का गजब का जज़बा दिखा हमें, लेकिन अध्ययन सामग्री का अभाव उन्हे आगे बढने से रोक रहा था। उन बच्चियों की आगे बढने की इच्छा ने हमें प्रेरित किया कि, हमको उनके लिये कुछ करना है। यहीं से एक ऐसे सफर की शुरुवात हुई जहाँ मेरी आवाज उन सब बच्चों की आंखे बन गई जो शिक्षा के माध्यम से आगे बढना चाहते हैं।

मेरा उद्देश्य हैः- “शिक्षा के माध्यम से दृष्टीबाधित बच्चों को आत्मनिर्भर बनाना”

आज 2011 की छोटी सी शुरवात पूरे भारत के दृष्टीबाधित बच्चों को शिक्षा के प्रकाश से रौशन कर रही है। इस मुहीम में हम अध्ययन सामग्री को रेकार्ड करने के साथ-साथ विभिन्न प्रतियोगी परिक्षाओं जैसे- बैंक, रेल, एम.पी.पीएस.सी, यू पी एस सी, नेट तथा हिन्दी भाषी राज्यों का सामान्य ज्ञान रेकार्ड करने लगे और 2012 से उसे यू ट्यूब पर भी अपलोड करने लगे। इसका असर बहुत ही सकारात्मक हुआ। विभिन्न शहरों के दृष्टीबाधित बच्चे लाभान्वित हुए। यू ट्यूब से सामान्य बच्चों को भी इसका लाभ हो रहा है। इसके बाद हम इन्क्लुसिव प्लेनेट वेबसाइट पर भी शैक्षणिक ऑडियो अपलोड करने लगे। इस वेबसाइट से लगभग 10,000 दृष्टीबाधित बच्चे जुङे हुए थे। कुछ समय पश्चात ये वेबसाइट दुर्घटना वश बंद हो गई। लेकिन इस दौरान अधिकांश बच्चे मुझसे जुङ गये। मेरी रेकार्डिंग का दायरा बहुत ज्यादा बढ गया। विभिन्न शहरों के बच्चे मुझे अपनी पुस्तक भेजने लगे और हम उनको रेकार्ड करके उसकी सीडी बनाकर उनको भेज देते थे जो आज एक बङे क्षेत्र में तब्दील हो गया है। 2012 में ही आई वे ने मेरा इंटरव्यु लिया जिसका प्रसारण रौशनी का करवां के तहत भारत के लगभग 32 शहरों में विभिधभारती के माध्यम से दृष्टीबाधित बच्चों ने सुना। विगत वर्षों में मेरे द्वारा तैयार की गई बैंक अध्ययन सामग्री से पढकर लगभग 500 बच्चों का सलेक्शन बैंक में हुआ है। लगभग 50 बच्चों का रेल में एवं संविधा शिक्षा में भी लगभग 100 छात्र-छात्राओं का सलेक्शन हुआ है। प्रतियोगी परिक्षाओं के ऑडियो से लाभान्वित होकर कुछ बच्चे यूपीएससी में भी सलेक्ट हुए हैं। 10वीं से लेकर महाविद्यालय तक के छात्र-छात्राओं के लिये विषय सम्बंधी सामग्री को रेकार्ड कर चुके हैं जिससे अब तक हजारों बच्चे लाभान्वित हो चुके हैं।

दृष्टीबाधित बच्चों को आगे बढने में दूसरा अवरोध है, परिक्षा के समय सहलेखक (Scribe) की, जिसकी वजह से पढने के बावजूद समाज की उदासीनता उनको आगे बढने से रोक देती है। हमने इस ओर भी ध्यान दिया और विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं तथा वेबसाइट के माध्यम से तथा व्यक्तिगत भी हम लोगों को जागरुक करने का प्रयास किये। मेरा मकसद इन बच्चों को मुख्यधारा में भी लाना है। जिसके लिये 2012 में अपना ब्लॉग रौशन सवेरा बनाये जहाँ सामाजिक जागरुकता के लिये लेख लिखने लगे। जिसका सकारात्मक उत्तर प्राप्त हुआ। कार्य की अधिकता के कारण 12 जनवरी 2015 को हम वाइस फॉर ब्लाइंड नाम का एक क्लब बनाये जिसमें भारत के कई शहरों से लोग जुङ रहे हैं। हमारे क्लब का कन्सेप्ट भारत में बिलकुल नया है। इसमें हमारे सदस्य मेरे द्वारा भेजी गई पुस्तकों को रेकार्ड करते हैं और गुगल ड्राइव के माध्यम से हमें रेकार्ड अध्ययन सामग्री भेज देते हैं। हम उसे डाउन लोड करके उसकी सीडी बनाकर उन बच्चों को भेज देते हैं, जिनकी पुस्तक होती है। इसके अलावा हमारे सदस्य अपने शहर में ही आवश्यकता अनुसार परिक्षा के दौरान सहलेखक का दायित्व भी निभाते हैं। अभी मेरे क्लब में 250 सदस्य हैं। मेरा पूरा कार्य निःशुल्क है और मेरे सदस्य भी निःशुल्क ही कार्य करते हैं। अभी तक हम व्यक्तिगत ही सीडी एवं पोस्ट का खर्च वहन कर रहे हैं। शिक्षा की इस मुहीम में मेरा परिवार मेरे साथ है।

2014 में रेडियो उङान ने एक मुलाकात के तहत मेरा इंटरव्यु लिया। 2016 में लंदन के रेडियो करिश्मा द्वारा भी मेरा इंटरव्यु लिया गया जिसे भारत के साथ एशिया के अन्य पाँच देशों में भी सुना गया। इसके अलावा दैनिक भास्कर, फ्री प्रेस, हिन्दुस्तान टाइम्स, पत्रिका, दबंग दुनिया जैसे समाचार पत्रों तथा अच्छीखबर एवं मल्हार मिडिया पर मेरे कार्यों को स्थान दिया गया। जिससे इस मुहीम में लोग जुङते गये और अकेले शुरुवात किया गया सफर आज कारवां बन गया।

नई टेक्नोलॉजी को अपनाते हुए हम डेजी में रेकार्डिंग कर रहे हैं जिससे भविष्य में उनकी पढाई आसान हो जायेगी। डेजी क्या है?

DAISY (Digital Accessible Information Systems)

डेजी एक ऐसा तकनिकी मापन है, जिसके माध्यम से रेकार्ड की गई पुस्तक को सभी दृष्टीबाधित साथी आराम से पढ सकते हैं। ये तकनिक अत्याधुनिक है, जिसमें दृष्टीबाधित लोग आम पुस्तक की तरह ही रेकार्ड की हुई पुस्तक को पढ सकते हैं। जैसे कि, प्रत्येक पंक्ति, पैराग्राफ, पेज अनुसार, हैडिंग के अनुसार इत्यादि। उदा. यदि किसी को सीधे 10वां पेज ही पढना है तो वह डायरेक्ट 10वां पेज खोलकर पढ सकता है। ऐसा सामान्य रेकार्डिंग में संभव नही है। कहने का आशय ये है कि, डेजी के माध्यम से की गई रेकार्डिंग को सामान्य पुस्तक की तरह पढा जा सकता है जिससे उन्हे बहुत फायदा होगा। मेरी योजना है, इंदौर में एक बेहतरीन स्टुडियो बनाने की जिसमें और अधिक तथा बेहतर अध्ययन समग्री रेकार्ड हो सके। इस कार्य हेतु हमें आर्थिक सहयोग की आवश्यकता है। 

  
मेरा मानना है कि, यदि किसी को एक मछली देंगे तो उसको एक दिन का खाना देंगे लेकिन यदि हम उसे मछली पकङना सिखाते हैं तो उसको जिंदगी भर का भोजन उपलब्ध करा सकते हैं एवं आत्मनिर्भर बना सकते हैं। 


इसी बात को यथार्थ में लाने के लिये हम 1 मई से 7 मई 2016 तक अपने एक सदस्य के सहयोग से स्वरोजगार की एक कार्यशाला का आयोजन किये, जिसमें मुम्बई, गुजरात, मध्य प्रदेश, राजस्थान तथा उत्तर प्रदेश के दृष्टीबाधित सदस्यों ने बढचढ कर हिस्सा लिया। कार्यशाला के बाद एक रोजगार मेले का आयोजन किये जिसमें सभी दृष्टीबाधित साथियों ने कोल्ड ड्रिंक, पोहा, भेल, कपङें, पतंजली का प्रोडक्ट, गुजरात की खाद्य सामग्री जैसी वस्तुओं को उत्साह के साथ बेचा। आयोजन की सफलता का आलम ये है कि आज कई बच्चों एवं अन्य एन जी ओ द्वारा ये कार्यक्रम फिर से करने का अनुरोध हो रहा है।

इन बच्चों की जिज्ञासा को ध्यान में रखते हुए विगत एक वर्ष से सुबह समाचार रेकार्ड करके वाट्सअप के माध्यम से भेज रहे हैं जो लगभग सम्पूर्ण भारत के दृष्टीबाधित बच्चे सुन रहे हैं। इन समाचारों का चयन हम दैनिक भास्कर, दैनिक जागरण और गुगल न्यूज से करते हैं। वाट्सएप पर मेरे ग्रुप वाइस फॉर ब्लाइंड में हर रविवार को शाम को किसी ऐसे विषय पर चर्चा होती है जो प्रतियोगी परिक्षाओं में उपयोगी हो। आज की आधुनिक तकनिक वाट्सएप, स्काईप तथा यू ट्यूब के माध्यम से शिक्षा का प्रचार प्रसार सुगम हो गया है। एक जगह ही बैठे हुए विभिन्न शहरों के बच्चों को ऑन लाइन पढाना स्काईप के माध्यम से आसान हो गया है। YouTube पर मेरे ऑडियो को Anita Sharma के नाम से सर्च किया जा सकता है। YouTube मेरे 350 विडियो हैं जहाँ पर 12,967 subscribers हैं तथा 1,693,583 views हैं।

19 मई 2016 को अनिता दिव्यांग कल्याण समिति का पंजिकरण हो गया है। जिसका मकसद अपने दृष्टीबाधित साथियों को आत्मनिर्भर बनाना है और प्रयास ये है कि, इंदौर में ही शिक्षा की समस्त सुविधा उपलब्ध हो जाये जिससे हमारे दृष्टीबाधित साथियों को घर छोङकर दिल्ली न जाना पढे। रविवार को मन की बात में प्रधानमंत्री नरेनंद्र मोदी जी द्वारा सम्बोधित दिव्यांग शब्द हमें बहुत अच्छा लगा अतः हम सोमवार को इस नाम से आवेदन कर दिये, संभवतः मध्य प्रदेश में इस नाम से ये पहला पंजिकरण है। 


 मेरी आवाज किसी की आँखें बन जायें इसी मकसद को लेकर कार्य कर रहे हैं, अतः जो भी नई तकनिक इन लोगों के लिये लाभदायक होती है उसे सीखकर उस माध्यम से रेकार्डिंग करना हमें खुशी देता है। अब तक हम 2000 से भी ज्यादा किताब mp3 में रेकार्ड कर चुके हैं। जो निरंतर जारी है इसी के साथ अब डेजी में भी पुस्तक रेकार्ड करना शुरु कर दिये हैं। डेजी में अब तक 6 पुस्तक रेकार्ड कर चुके हैं। 2015 में हम डेजी की सदस्यता लिये हैं। जिसकी ट्रेनिंग के लिये बैंगलोर गये थे। 

आप सबके साथ से हजारों दृष्टीबाधित बच्चों का सपना साकार हो सकता है। किसी सार्थक काम का मौका देकर जिंदगी हमें सबसे बङा ईनाम देती है। आज दृष्टीबाधिता लाचारी नही है, हम सबका सहयोग और विज्ञान की नई टेक्नोलॉजी से हमारे दिव्यांग साथी भी आत्मनिर्भरता का जीवन यापन कर सकते हैं, जो हमारे समाज के लिये सुखद पल होगा। शिक्षा के इस हवन में आपके सहयोग की अभिलाषा रखते हैं। अधिक जानकारी हेतु मेल करें ......
Thanks & Regards

Anita Sharma

Mail ID:- voiceforblind@gmail.com 

                 sharmaanita207@gmail.com

YouTube :- Anita Sharma






Friday, 3 June 2016

अनिता दिव्यांग कल्याण समिती



रौशन सवेरा के सभी पाठकों को हर्ष के साथ सुचित करना चाहते हैं कि, "अनिता दिव्यांग कल्याण समिती"  का पंजियन हो गया है। वाइस फॉर ब्लाइंड की छत्र-छाया में वर्ष 2011 से दृष्टीबाधित लोगों को शिक्षा के माध्यम से आत्मनिर्भर बनाने का कार्य निरंतर और निःशुल्क गतिमान है। अब इस कार्य को विकास की नई ऊँचाइयों तक ले जाने में अनिता दिव्यांग कल्याण समिती का विशेष योगदान रहेगा। जिसके तहत एक ऑडियो लाइब्रेरी बनाने का सपना है। 

आप लोग सोच रहे होंगे कि, कार्य तो बिना पंजियन के भी चल रहा था फिर पंजियन की आवश्यकता क्यों 

मित्रों, दृष्टीबाधित लोगों के लिये अध्ययन सामग्री को रेकार्ड करने का कार्य तथा परिक्षा के समय सहलेखन का कार्य यकिनन बेहतर चल रहा है किन्तु इसे नई तकनिक के साथ आगे बढाने के लिये पंजियन एक मजबूत पहल है। 2015 में हम डेजी की सदस्यता ले चुके हैं लेकिन सदस्यता की शर्त थी कि भविष्य में संस्था रजिस्टर्ड होना चाहिये।  नई तकनिक डेजी के माध्यम से रेकार्ड की गई पुस्तक से पढाई अधिक सुविधा जनक है। अब समझते हैं डेजी के बारे में,......



डेजी क्या है

DAISY (Digital Accessible Information Systems)


डेजी एक ऐसा तकनिकी मापन है, जिसके माध्यम से रेकार्ड की गई पुस्तक को सभी दृष्टीबाधित साथी आराम से पढ सकते हैं। ये तकनिक अत्याधुनिक है, जिसमें दृष्टीबाधित लोग आम पुस्तक की तरह ही रेकार्ड की हुई पुस्तक को पढ सकते हैं। जैसे कि, प्रत्येक पंक्ति, पैराग्राफ, पेज अनुसार, हैडिंग के अनुसार इत्यादि।

उदा. यदि किसी को सीधे 10वां पेज ही पढना है तो वह डायरेक्ट 10वां पेज खोलकर पढ सकता है। ऐसा सामान्य रेकार्डिंग में संभव नही है। कहने का आशय ये है कि, डेजी के माध्यम से की गई रेकार्डिंग को सामान्य पुस्तक की तरह पढा जा सकता है जिससे उन्हे बहुत फायदा होगा। इस तरह की रेकार्डिंग को पढने के लिये डेजी उपकरण भी होता है। जिसे सरकार की तरफ से उपलब्ध कराया जा रहा है। इसमें एक तकनिक ऐसी भी है, जिससे टेक्स संदेश का प्रदर्शन भी होता है और आवाज भी आती है। डेजी तकनिक दृष्टीबाधित लोगों के लिये बेहतर भविष्य है।  विदेशों में इस तकनिक का लाभ हमारे दिवयांग साथी ले रहे हैं। भारत में भी कुछ शहरों में शुरुवात हुई है लेकिन अपने इंदौर में इसका अभाव है।

मेरी आवाज किसी की आँखें बन जायें इसी मकसद के साथ निरंतर आगे बढ रहे हैं जिसके तहत जो भी नई तकनिक इन लोगों के लिये लाभदायक होती है उसे सीखकर उस माध्यम से रेकार्डिंग करना हमें खुशी देता है। अब तक हम 2000 से भी ज्यादा किताब mp3 में रेकार्ड कर चुके हैं, जो निरंतर जारी है। इसी के साथ अब डेजी में भी पुस्तक रेकार्ड करना शुरु कर दिये हैं। डेजी में अब तक 6 पुस्तक रेकार्ड चुके हैं। मित्रों, इच्छा तो वाइस फॉर ब्लाइंड नाम से ही संस्था बनाने की थी किंतु पंजियन कार्यलय के अधिकारी को ये नाम समझ में नही आया अतः अनिता दिव्यांग कल्याण समिती नाम अस्तित्व में आया। फिलहाल वाइस फॉर ब्लाइंड के लोगो का ट्रेड मार्क रजिस्ट्रेशन करवा लिये हैं जिसके संरक्षण में जो दृष्टीबाधित बच्चे रोजगार करके आगे बढना चाहते हैं उनकी मदद की जा सकेगी। अब मेरा सपना है  इंदौर में एक स्टुडियो बनाने का जहाँ उच्चकोटी की रेकार्डिंग हो और अध्ययन सामग्री की बेहतरीन ऑडियो लाइब्रेरी का गठन हो। 


सभी पाठकों से निवेदन है कि, शिक्षा के इस प्रकाश में आप भी सहयोग का एक दिपक अवश्य प्रज्वलित करें। 


धन्यवाद 
अनिता शर्मा 

Wednesday, 11 May 2016

दृष्टीबाधितों हेतु स्वरोजगार कार्यशाला


मित्रों, गत सप्ताह  कुछ कर गुजरने की चाहत लिये विभिन्न राज्यों के हमारे दृष्टिबाधित साथियों ने वाइस फॉर ब्लाइंड द्वारा आयोजित स्वरोजगार कार्यशाला में आत्मनिर्भता की और एक कदम बढाते हुए जलेसर उत्तर प्रदेश में उपस्थित हुए। वाइस फॉर ब्लाइंड के वालिंटर अंचल अग्रवाल इस आयोजन के सहयोगी पार्टनर थे जिनके सहयोग से आर्दश इंटर कॉलेज में सात दिन तक प्रवास की व्यवस्था की गई थी। इस कार्यशाला में 1मई से 7मई 2016 तक गुजरात, मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र तथा उत्तर प्रदेश के दृष्टीबाधित साथियों ने शिरकत की। सबसे पहले दिन सभी बच्चों को ताजमहल का दिदार कराया गया। जिसे उन्होने छुकर महसूस किया। 


कार्यशाला का मुख्य उद्देश्य थाः-  स्वरोजगार के द्वारा आत्मनिर्भर बनना
मित्रों, जिसतरह आज पढने के बाद भी नौकरी मिलना एक बहुत बङी समस्या बनी हुई है, ऐसे में आत्मनिर्भरता हेतु हमें कुछ अलग विकल्प तलाश करना चाहिये। इसी बात को ध्यान में रखते हुए मैने सोचा कि क्यों न हम अपने साथियों को स्वरोगार के लिये प्रोत्साहित करें। इस कार्यशाला में ये समझाया गया कि दृष्टीबाधिता के बावजूद कौन सा कार्य किया जा सकता है तथा किस तरह उसे सफल बनाया जा सकता है। सबसे पहले तो आप सभी साथियों को ये बताना चाहेंगे कि आज विज्ञान की नई टेक्नोलॉजी इन लोगों के लिये वरदान है और कम्प्युटर इनकी आँखें हैं। जिसमें कुछ सॉफ्टवेयर जैसे कि जॉज 13,14 और 16 कम्प्युटर पर कार्य करना आसान बना देते हैं। इसी को आधार बनाकर कुछ ऑनलाइन बिजनस के बारे में मैने समझाया, जैसे किः- ऑनलाइन अनुवादक का कार्य, स्क्रिप्ट राइटिंग तथा प्रचार लिखने का काम। जिसकी आवाज अच्छी हो वो ऑनलाइन डबिंग का काम भी कर सकता है। इसके लिये कई वेब साइट हैं जहाँ रजिस्ट्रेशन कराकर कार्य किया जा सकता है। इसके अलावा अपनी वैज्ञानिक आँखों के सहारे टूर एण्ड ट्रैवल तथा साइबर कैफे का बिजनस भी किया जा सकता है। ऑनलाइन शॉपिंग का भी चलन बहुत ज्यादा चल रहा है इस हेतु अपनी वेबसाइट बनाकर एक शॉप रजिस्टर की जा सकती है। 


ऐसे ही और भी बहुत से काम ऑनलाइन के माध्यम से किये जा सकते हैं। इसके अलावा ऑफलाइन भी बहुत से काम किये जा सकते हैं वैसे ये कहना अतिश्योक्ति न होगा कि ये बच्चे लगभग सभी बिजनस कर सकते हैं। यहाँ ट्रेनिंग के दौरान उन्हे पंतजली के 12 प्रोडक्ट को बेचने की ट्रेनिग दिये थे हम जो बहुत सफल रहा। इसके अलावा गुजरात के लोग वहाँ से खाने का समान तथा उनकी संस्था द्वारा बनाये गये समान जैसे कि- ऑफिस फाइल, अगरबत्ति तथा कैंडिल लेकर आये थे। जिसको बेचने की ट्रेनिंग इस कार्यशाला में दी गई। अंचल की तरफ से प्लास्टिक के समान तथा कोल्ड ड्रिंक बेचने की ट्रनिंग दी गई। इसी दौरान एक 2 मई को अच्छी खबर वेबसाइट के गोपाल मिश्रा का भी लेक्चर था। उन्होने पर्सनालटी डेवलपमेंट तथा इंटरव्यु के कौशल को निखारने हेतु कुछ सुझाव दिये।

कार्यशाला के आखिरी दिन एक मेले का आयोजन किया गया। जहाँ सभी प्रतिभागियों ने अपनी-अपनी दुकान लगाई और जलेसर की जनता को उसमें ग्राहक के तौरपर आमंत्रित किया गया। हमारे सभी दृष्टीबाधित साथियों ने सफलता पूर्वक दुकानदारी की जिसे देखकर वहाँ की सभी जनता आर्श्यचकित थी क्योंकि समान बेचने से लेकर रुपये का लेन देन तक इन साथियों ने स्वतः ही किया। कुछ दुकान पर हमारे कार्यकर्ता सिर्फ ये वॉच करने के लिये थे कि कहीं कोई समान कुछ असमाजिक तत्व चोरी न कर लें। इंदैर के कुछ बच्चों ने तो इंदौरी पोहे की दुकान लगाई जिसमें उनके साथ एक लोविजन साथी था। पोहे की दुकान पर जबरदस्त बिक्री हुई। गुजरात के सभी आइटम भी बिक गये थे। कुछ लोगों ने टॉफी की दुकान लगाई थी। कोल्डड्रिंक तथा टॉफी की दुकान पर भी जबरदस्त रिस्पॉस मिला। यहाँ सभी बच्चों ने पहलीबार ये कार्य किया था जिसमें वे उम्मीद से कहीं ज्यादा उत्साह पूर्वक कार्यकरते हुए सफल रहे। 


सात दिन के बीच में एक दिन पर्यावरण को प्रोत्साहन देने हेतु वृक्षारोपण का कार्यक्रम भी रखा गया था, जिसमें सभी बच्चों ने बहुत उत्साह के साथ पौधारोपण किया। 



मुझे ये कहते हुए अत्यधिक प्रसन्नता हो रही है कि, स्वरोजगार हेतु  पहला कदम सफल रहा। बच्चों के उत्साह ने ये सिद्ध कर दिया कि आँधियों को जिद्द है जहाँ बिजली गिराने की वहीं जिद्द है हमें अपना आशियाँ बनाने की। 

धन्यवाद
Voice For Blind 




Tuesday, 26 April 2016

जीवन में सफल होना है तो, सपने देखें




मंजिल उन्ही को मिलती है जिनके सपनो में जान होती है, पंखो से कुछ नही होता हौसले से उङान होती है। जी हाँ मित्रों, प्रत्येक मनुष्य अपनी सफलता के लिये बेहतरीन सपने देखता है, सच तो ये है की जीवन में सफलता इन्ही सपनो के आधार पर मिलती है और इससे पहले की सपने सच हों हमें सपने देखना होगा। किसी ने सच कहा है कि अपने सपनो को साकार करने के लिये दृणसंकल्प हो जाओ तो इस दुनिया की कोई भी ताकत उसे पूरा होने से नही रोक सकती।


कई बार सपने जल्दी पूरे नही होते और हम लोग उम्र की दुहाई देकर तथा भाग्य में नही है ये सोचकर अपने सपनो को एक ऐसा सपना समझ लेते हैं जो कभी पूरा नही होता। वास्तविकता तो ये है कि, सपने देखने और सपनो को साकार करने की इच्छा किसी भी उम्र की मोहताज नही होती। ये भी एक सच्चाई है कि हमारे देश में सरकारी नौकरी के लिये आयु सीमा का निर्धारण किया गया है लेकिन इसका मतलब ये तो नही है कि सपनो को पूरा करने के अन्य विकल्प न हो। ऐसा भी नही है कि जो लोग आगे बढना चाहते हैं उनके लिये रास्ते बंद हो गये हों। वर्तमान की यदि बात करें तो भारत सरकार की कई ऐसी योजनाएं हैं, जो हमें अपने सपनो को साकार करने में मददगार हैं क्योंकि नींद नही सपने बदलते हैं, मंजिल नही रास्ते बदलते हैं, जगा लो जीतने का जज़बा , किस्मत की लकीरें बदले या न बदले वक्त जरूर बदलता है।



धीरूभाई अंबानी ने कहा है कि, "जो सपने देखने की हिम्मत रखते हैं वो सारी दुनिया जीत जाते हैं।"

मित्रों, रास्ते तो बहुत हैं, सिर्फ दरकार है जीवन में कुछ कर गुजरने की दृणइच्छाशक्ती की जिसके लिये उम्र बाधा नही है। मन में ठान ले तो जीत है वरना, लक्ष्य के करीब होते हुए भी व्यक्ति निराश हो जाता है। मन की शक्ति को पहचान कर ही लियोनार्डो दि विन्ची ने 51 वर्ष की उम्र में अपनी पेटिंग मोनालिया को बनाया था। जो उनके जीवन की सबसे प्रसिद्ध पेंटिग है। गोस्वामी तुलसीदास जी ने तो 90 वर्ष की आयु में तुलसी राम चरित्र मानस लिखी थी। नेल्सन मंडेला का अधिकतम जीवन संघर्ष में बीत गया था। फिर भी वे 75 साल की उम्र में दक्षिण अफ्रिका के राष्ट्रपति बने।


महात्मा बुद्ध का कहना था कि, "जिसने अपने मन को वश में कर लिया, उसकी जीत को देवता भी हार में नही बदल सकते"।


मनोवैज्ञानिकों का तो कहना है कि.....

जिन लोगों के सपने अधुरे रह गये हों तो उन्हे अपने सपनों को महत्व देना चाहिये। आज तो विज्ञान की इतनी टेक्नोलॉजी आ गई है जिसकी मदद से हम शारीरिक असमर्थता के बावजूद अपने सपनो को पूरा करते हुए कामयाबी का सफर तय कर सकते हैं।विश्व प्रसिद्ध वैज्ञानिक और लेखक स्टीफन हॉकिंस को तो आप सब जानते ही होंगे। नब्बे फीसदी विकलांग होने के बावजूद उनकी क्षमता का लोहा पूरी दुनिया मानती है। महान वैज्ञानिक स्टीफन विलियम हॉकिंग पर 'जितेंद्र' शब्द बिल्कुल सटीक बैठता है। वे एक न ठीक होने वाली बिमारी यानी स्टीफ मोटर न्यूरॉन बिमारी से पीङित हैं। बचपन से होनहार और महत्वाकांक्षी स्टीफन के सपने भी बहुत महत्वाकांक्षी थे, जिसे वे अपनी बिमारी के बावजूद भी खुली आंखों से देख रहे हैं तथा उसे पूरा करने में शिद्दत से लगे हुए हैं। हॉकिंग के जज़बे का आलम ये है कि वे व्हीलचेयर पर बैठे - बैठे अंतरिक्ष विज्ञान की जटिल पहेलियों और रहस्यों को सुलझा रहे हैं। ब्लैक होल को लेकर उनकी थ्योरी बहुत मजेदार है। हॉकिंस खासतौर से कॉसमोलॉजी पर काम कर रहे हैं। जिसके अंतर्गत ब्रह्मांड की उत्पत्ती, संरचना और स्पेस के बारे में अध्ययन किया जाता है।

दोस्तों, जिंदगी को बेहतर बनाने की संभावना हमेशा रहती है। सफलता पाने के लिये हमारी परिस्थिती और बीता हुआ कल कभी भी अवरोध नही बन सकते क्योंकि हर नया दिन हमें नये उजाले के साथ हमें आगे बढने की प्रेरणा देता है। हम सबके प्रिय मिसाइल मैन ए.पी.जे. कलाम साहब कहते हैं कि, सपने देखना कभी न छोङें और सपने वो हों जो आपको नींद न आने दें।

एक प्रसिद्ध दार्शनिक ने कहा है कि, जीवन में कोई व्यक्ति तब तक बुढा नही होता जबतक वह अपने सपने पूरे करने में लगा रहता है। गाँधी जी ने कहा था कि, सपने ऐसे देखो की आप हमेशा जीवित रहोगे। कहते हैं सफलता के सपनो का रुकना मनुष्य को कमजोर एवं असाहय कर देता है इसलिये उम्र का कोई भी दौर क्यों न हो अपने सपनो को कभी भी मरने नही देना चाहिये। इन्हे हमेशा अपनी पॉजीटिव सोच और मजबूत इरादों से सिंचना चाहिये क्योंकि आँखों में सजे सपने ही हम सबकी आशाओं के स्रोत हैं। तो हम सब सपने देखें और अपनी दृण सोच के साथ सपनो को आसमान छुने दें।


हर सपने में चमक होती है,


हर राह एक मंजिल होती है,


रख हौसला कुछ कर दिखाने का,


हर सपने की जीत होती है।


Saturday, 16 April 2016

धन्यवाद :)




मित्रों, इस महिने बैंक तथा रेल में कार्य करने हेतु हमारे कई विद्यार्थियों का सलेक्शन हुआ है। सबसे पहले तो उन सभी दिव्यांग साथियों को बहुत-बहुत बधाई जिनका सलेक्शन हो गया है। इन बच्चों का सफर आसान नही है लेकिन इनका जज़बा और आगे बढने तथा आत्मनिर्भर बनने की लगन ने इनके सपने को साकार किया है। इन बच्चों के सफर में अपने समाज के कई सहयोग के हाँथ भी लगातार साथ दे रहे हैं। भारत के विभिन्न शहरों में वाइस फॉर ब्लाइंड के माध्यम से लोग उम्दा तथा समय पर रेकार्डिंग कर रहे हैं, जिससे हमारे दिव्यांग साथी बराबर लाभांवित हो रहे हैं। सहलेखन की व्यवस्था में भी हमारे युवा हेल्पिंग हेंड के साथ बराबर सहयोग दे रहे हैं। हम सबकी इस मुहीम में हमारे सम्माननिय पत्रकार गणं भी अपने-अपने समाचार पत्रों के माध्यम से लोगों को जागृत कर रहे हैं और अपने अंदाज में इस कार्य में सहयोग देकर वाइस फॉर ब्लाइड के मकसद को साकार कर रहे हैं। हमारा उद्देश्य है - शिक्षा के माध्यम से दृष्टिबाधित लोगों को आत्मनिर्भर बनाना। 



वाइस फॉर ब्लाइंड कल्ब के सदस्यों के साथ अच्छीखबर वेब साइट के संस्थापक  गोपाल मिश्रा तथा मल्हार मिडिया की सीईओ ममता जी का भी बराबर सहयोग मिल रहा है। समाचार पत्र पत्रिका के उमेश जी, फ्री प्रेस के तरुण जी, दैनिक भास्कर के अमित जी तथा हिंदुस्तान टाइम्स की निडा का सहयोग भी लोगों को इस कार्य हेतु जोङ रहा है। हम सभी साथियों का तहे दिल से धन्यवाद देते हैं कि उन्होने हमें हौसला दिया तथा 2012 में अकेले चले इस सफर को  सहयोग का कारवां बना दिया। भविष्य में भी आप सबके साथ की आकांक्षा रखते हैं। और भी कई नये सहयोग के हाँथ आगे आयेंगे इस बात का विश्वास है।  पुनः आप सबको बहुत-बहुत धन्यवाद तथा बधाई 




परहित सरसि धर्म नही कोई


वसुधैव कुटुबंकम की भावना से पल्लवित हमारी भारतीय संस्कृति की पहचान है  परहित सरसि धर्म नही कोई । "साथी हाँथ बढाना एक अकेला थक जायेगा मिलकर बोझ उठाना"  मदर इंडिया का ये प्रसिद्ध गाना लगभग हम सभी की जुबान पर है. इस गीत में जिवंत समाज का बहुत ही महत्वपूर्ण संदेश छुपा हुआ है क्योंकि प्रकृति के नियमानुसार  भी सभी जीव जगत का जीवन चक्र सहयोग की बुनियाद पर ही टीका है।  परिवार, समाज, देश हो या दुनिया सब एक दूसरे के सहयोग से ही फल फूल रहे हैं। ऐसे में समाज की कमजोर कड़ी को विशेष ध्यान की आवश्यकता  होती है।  जो किसी भी समाज की उन्नति के लिये आवश्यक चरण है। अक्सर हम सबने महसूस किया होगा कि परिवार में जो बच्चा सबसे कमजोर होता है, माँ का उस पर विशेष स्नेह होता है। ऐसे ही स्नेह की अपेक्षा हमारे दृष्टीबाधित साथी भी चाहते हैं, जहाँ उन्हे दया नही बल्की आगे बढने के लिये हम सबका सहयोग  चाहिये।

आज सरकार द्वारा अनेक सुविधायें देने की बात कही जाती है। परन्तु ये सुविधायें और योजनायें सिर्फ मंत्रालय की फाइलों मे ही सिमट कर रह गईं हैं या चंद शहरों चंद संस्थानों की ही अमानत है। आज भी अनेक शहरों में दृष्टीबाधित बच्चे उन योजनाओं से वंचित है। जैसे कि, परिक्षा के समय सहलेखक को दिया जाने वाला भत्ता हो या रेर्काडिंग की सुविधा।  सबसे बड़ी विडंबना है कि, सरकार द्वारा पारित योजनाओं को सरकार के ही अधिनस्त कर्मचारी नही मानते और अपने मन की करते हैं। उदाहरण के तौर पर 2013 की सहलेखन की गाइड लाइन को अनेक राज्यों के विद्यालय अभी भी नही मान रहे हैं। जिसका खामियाजा उन लोगों को भुगतना पड़ता है जिनकी कोई गलती नही है। दृष्टीबाधिता हो या किसी भी प्रकार की शारीरिक विकलांगता, सरकार तथा समाज की उदासीनता की बली चढ जाती है। 

आज अनेक उदासीनता के बावजूद भी कई  सहयोग के हाँथ भी आगे बढ रहे हैं। जिसका सफल परिणाम भी दिखाई दे रहा है। इस महिने बैंक के आये परिणाम में मेरे 15 विद्यार्थियों का सलेक्शन विभिन्न बैंको में हुआ है। इसके साथ ही voice for blind कल्ब के माध्यम से सहयोग करने के लिये आज के युवा अपना समय दे रहे हैं और कई लोग देने के लिये अपनी इच्छा जता रहे हैं। ये सहयोग भारत के भविष्य के लिये एक अच्छा संकेत है और उन सभी दृष्टीबाधित लोगों के लिये शुभ संकेत है जो अनेक परेशानियों के बावजूद भी आगे बढना चाहते हैं, आत्मनिर्भर होना चाहते हैं। 



धन्यवाद

जय भारत 






Thursday, 14 April 2016

शुभ रामनवमी


          आप सबको रामनवमी की हार्दिक बधाई 
                 

नवराते में शक्ति पूजें, हर तन बने बज्र के जैसा,
 राज करे चाहे कोई भी, राजा हो श्रीराम के जैसा।

हर शबरी के द्वार चलें हम, जहां अहिल्या दीप जलाएं,
राम तत्व है सबके अंदर, आओ फिर से उसे जगाएं।

शुभ-अवसर है राम-जन्म का, आओ सब मिल शीश झुकाएं,
अंदर बैठे तम को मारें, आओ मिलजुल खुशी मनाएं।

Friday, 8 April 2016

गायत्री मंत्र का शाब्दिक महत्व



ऊँ भूर्भुवः स्वः तत् सवितुर्वरेण्यं भर्गो देवस्य धीमहि धियो यो नः प्रचोदयात्

गायत्री मंत्र के प्रत्येक अक्षर का महत्व है। गायत्री मंत्र महामंत्र है जिसमें ऊँ परमात्मा का पावन नाम और सभी तरह के जीवन-साधनाओं व शक्तियों का परम् कारण है। भूभुर्वः स्वः के तीनों प्राकृतिक गुणं से कर्म, ज्ञान और भक्ति की अभिव्क्ति होती है। नवरात्री के नौ दिन और गायत्री मंत्र के नौ शब्द की प्रासांगिता अद्भुत संदेश है।

गायत्री मंत्र का पहला शब्द तत् है जो हमें  देवी के पहले स्वरूप शैलपुत्री के साथ जीवन-साधना में स्थिरता के महत्व को दर्शाता है। इस शब्द में पर्वतीय पर्यावरण के संरक्षण का महान संदेश भी है।

दूसरा शब्द है, सवितुः – इसमें देवी के द्वितीय रूप ब्रह्मचारिणी की शक्ति निहित है। साथ ही इसमें जीवन साधना में पवित्रता के महत्व को भी दर्शाया गया है। इसमें प्रकृति एवं उसके घटकों में सार्वभौमिक ब्रह्मस्वरूपिणी एकता का संदेश समाहित है।

तीसरा शब्द है, वरेण्यं- इसमें प्रकृति की आह्लादकारिणी शक्ति चंद्रघंटा निहित है। इसमें जीवन साधना में एकाग्रता के महत्व को बताया गया है। इसमें प्रकृति के सभी जीवों के सुख को संवर्द्धित करने का संदेश है।

चौथा शब्द है, भर्गो- इस स्वरूप में कूष्मांडा निहित है। ये शब्द जीवन-साधना में संयम का संदेश देता है। माना जाता है कि ये देवी ब्रह्मांड को उत्पन्न करने वाली हैं, इनमें आपदाओं और प्राकृतिक प्रबंधन का संदेश निहित है।

पाँचवा शब्द है, देवस्य- इस शब्द में देवी के पाँचवे स्वरूप स्कंदमाता की शक्ति है। ये शब्द जीवन में सदाचार के महत्व को दर्शित करता है।ये शब्द माता-पिता और उनके बच्चों में मधुरता का संदेश है।

छठा शब्द है, धीमहि- इसमें देवी कात्यानी की महा शक्ति समाहित है। इस शब्द में प्रकृति का संरक्षण करने वाले ऋषियों की जीवन शैली को अपनाने का संदेश विद्यमान है।

सातवां शब्द है, धियो- इस शब्द में कालरात्री या महाकाली की शक्ति निहित। ये शब्द प्रकृति को समर्पित जीवन जीने का संदेश देता है।

आठवां शब्द है, यो नः – इस शब्द में महा गौरी की शक्ति समायी हुई है। इसमें ये संदेश दिया गया है कि, यदि मनुष्य अपनी अंतः शक्ति का परिष्कार कर ले तो बाह्य प्रकृति स्वतः ही वरदायनि हो जाती है।

नौवाँ शब्द है, प्रचोदयात् – इस शब्द में सिद्धिदात्री देवी की शक्ति समाहित है। इस शब्द के माध्यम से समझाया गया है कि, जो मनुष्य परोपकार को अपना लेता है। प्रकृति उसके जीवन के सभी कार्यों को सिद्ध करने वाली सिद्धिदात्री बन जाती है।

मित्रों, आज के इस विस्फोटक युग में ये मंत्र बहुत ही प्रासांगिक है अतः हम सबको कम से कम नवरात्री में तो अवश्य ही गायत्री महामंत्र का जाप करना चाहिये और इसी के साथ प्राकृतिक संसाधनों तथा प्रकृति के नियमों की रक्षा करना हम सबका प्रथम कर्तव्य होना चाहिये।

जय माता दी, जय भारत    

Thursday, 7 April 2016

नव वर्ष अभिनंदन



आप सभी को नव वर्ष की मंगल कामनाओं के साथ नवरात्री की हार्दिक बधाई। माँ दुर्गा के आर्शिवाद से आप सबके जीवन में खुशियों की बहार आये। आप सबका जीवन मंगल दीपों से प्रकाशित रहे। 
माँ दुर्गा का अनुपम पर्व

Sunday, 3 April 2016

एक खत बेटियों के नाम

चिठ्ठी न कोई संदेश ना जाने कौन से देश तुम चली गई... आनंदी तुम लाखों लोगों के लिये अन्याय के खिलाफ आवाज उठाने का हौसला थीं, फिर ऐसा क्या हुआ कि तुम अपनी ही जिंदगी को दाव पर लगा दी। तुम तो चली गईं लेकिन अपने पीछे कई प्रश्न छोङ गईं, कई लोगों को रोता-बिलखता छोह गईं। प्रत्युषा तुम एक कामयाब एक्टर थीं और तुम्हारी  तरह आज लाखों बेटीयां अपने कैरियर के प्रति जागरूक हैं और सफलता के आसमान पर उङने को तैयार हैं। लेकिन तुम्हारी मौत कई सवाल मन में उत्पन्न कर रही है क्योंकि तुम्हारी मौत के जिन कारणों को बताया जा रहा है उससे तो यही लग रहा है कि, ये कैसा रिश्ता है... जो हजारों अपनो के होते हुए ऐसी दुनिया बन जाता है कि जिसकी बेपरावाही जिंदगी ही खत्म करने पर मजबूर कर देती है। एक अकेला रिश्ता हजारों चाहने वाले रिश्तों पर भारी हो जाता है। आज हम सबको इस बात को गम्भीरता से सोचना होगा। आज आधुनिक बन जाना बोल्ड हो जाना या आर्थिक रूप से सक्षम हो जाना ही पर्याप्त नही बल्की मानसिक रूप से मजबूत होना ज्यादा आवश्यक है। आज हम अपनी बेटियों को आगे बढाने और पढाने में दिलो जान लगा देते हैं और बेटी की तरक्की पर गर्व भी महसूस करते हैं। परंतु कहीं न कहीं हम अभिभावक और हमारा समाज उसे वो सुरक्षा तथा प्यार नही दे पाता जिसके आधार पर वो वैचारिक रूप से मजबूत बन सके। हम उन्हे ये समझाने में शायद नाकाम हो रहे हैं कि, आज आप हर तरह से सम्पन्न हो , आप में सहनशीलता भी है और समझौता (Compromise)  करने का हुनर भी है। फिर क्यों किसी को इतना महत्व दे देती हो कि वो तुम्हारी जिंदगी एवं तुम्हारे स्वाभीमान पर ग्रहण लगा देता है। हम मानते हैं कि बेटियों में रिश्तों को निभाने का गुणं उनकी कमजोरी नही है बल्की उनके प्यार का एक रुहानी एहसास है। जो हर संभव कोशिश करता है कि, रिश्तो में मिठास बनी रहे क्योंकि रिश्तों को निभाने का संस्कार उन्हे बचपन से घुट्टी में पिलाया जाता है। हर संभव प्रयास के बाद भी यदि बात नही बनती तो मेरी बेटियों आप ये क्यों नही समझती की ताली दोनों हांथ से बजती है , कोई भी रिश्ता दो लोगों के प्यार और सहयोग से ही बढता है। फिर दूसरे की गलती और इगनोरेंस की वजह से खुद को क्यों मिटा देनी की सोचती हो। अक्सर देखने को यही मिलता है कि  प्यार में नाकामी का खामियाजा ज्यादातर लङकियों को ही भुगतना पङता है। अगर किसी को मना कर दे तो उसपर ऐसिड फेंक दिया जाता है तो दूसरी तरफ लङके का नकारात्मक रवैया उसे आत्महत्या तक पहुँचा देता है।

मेरी बच्चियों जिंदगी बहुत प्यारी है इसे उस व्यक्ति पर कभी भी कुरबान न करो जिसको आपकी कद्र नही है। जिन्दगी से बढकर कोई रिश्ता नही होता। आप हर तरह से सक्षम हो और ये भी सच है कि हर परेशानियों का हल है, तो समस्या का  समाधान ढूंढों खुद पर विश्वास रखते हुए निकल पङो जिंदगी की हर जंग को लङने के लिये। जंग मुश्किल जरूर है पर नामुमकिन नही। माना समाज में कई बातें अपने फेवर में नही हैं पर ये भी सच है कि तुम हो; तभी तो समाज है। तुम्हारी जिंदगी बादल पर उङने वाली परी है, जिसमें हर अपनों की खुशी छुपी है। 

Please read  जीवन अनमोल है