Sunday, 5 April 2020

आओ आशाओं के दिए जलाएं

मित्रो, जिस तरह रात के बाद सुबह की किरण इस बात का आगाज करती हैं कि सब संभव है। उसी तरह निराशाओं के घनघोर अंधकार को आशाओं और उम्मीदों के उजाले से  हम सब मिलकर  कोविड 19  से व्याप्त निराशा के माहौल को 9 दिए के माध्यम से नौ दो ग्यारह कर सकते हैं।

मित्रों, उम्मीद तो वर्षों से दरवाजे पर खङी वो मुस्कान है, जो हमारे कानो में धीरे से कहती है सब अच्छा होगा। आइये रात 9 बजे हम सब मिलकर ....

"मन की अलसाई सरिता में, नई उम्मीदों की नाव चलाए। नभ की सिमाओं पर, आशाओं के दीप जलाएं।।"
धन्यवाद
अनिता शर्मा
voiceforblind@gmail.com

Tuesday, 24 March 2020

गुङिपङवा, नववर्ष और चैत्र नवरात्र की हार्दिक हार्दिक बधाई




मित्रों,
नव वर्ष की इस पावन बेला पर चन्दन मिश्रित चले बयार, नमस्कार की परंपरा का विश्व में शंखनाद हो। बंद हो कोरोना का रोना, मंगलमय सारा संसार रहे और आशाओं के गीत चारों दिशाओं में गूंजते रहें। हाट, बाजार, मंदिरों में रौनक फिर से बहाल हो जाये। सुखी और स्वस्थ जीवन का सपना साकार होजाये। स्वर्ण रश्मियों के रथ पर सवार सूरज! हर घर आंगन में खुशियों का उपहार बांटे। इसी शुभकामना के साथ गुङिपङवा, नववर्ष और चैत्र नवरात्र की हार्दिक हार्दिक बधाई 🙏🙏🙏

आइये हम सब मिलकर आज की परिस्थिती में सुरक्षा के संकल्पों के साथ नये अनुष्ठान का आहवान करें ...... जय हिंद वंदे मातरम् 






Saturday, 15 February 2020

मोबाइल दुनिया और सिमटता बचपन


आज हर तरफ मोबाइल जीवन का महत्वपूर्ण हिस्सा बन गया है। मोबाइल ने जहाँ दुनिया को छोटा कर दिया है, वहीं कुछ ऐसी समस्याओं को भी जन्म दे रहा है जिससे भारत का भविष्य कहे जाने वाले बच्चे अत्यधिक प्रभावित हो रहे हैं। आज दो तीन वर्ष के बच्चों को भी मोबाइल का इस्तमाल करते बहुतायत में देखा जा सकता है और अनेक अभिभावकों को ये कहते भी सुना जा सकता है कि, उनका बच्चा मोबाइल देखे बिना खाना नही खाता या वो मोबाइल के लिये बहुत जिद्द करता है।

दोस्तो, ये वो उम्र होती है जिसमें क्या अच्छा है क्या बुरा है समझना नामुमकिन है। ऐसे में मन में ये प्रश्न आना भी लाज़मी है कि, इतने छोटे बच्चे के सामने मोबाइल रूपी जिन्न प्रकट कहां से हुआ। स्वाभाविक है कि, ये जिन्न परिवार के सभी सदस्यों के हांथ में हर पल विराजमान है। मानते हैं कि, मोबाइल हमारे जीवन का एक अभिन्न अंग बन गया है, लेकिन इससे बच्चों पर पड़ने वाले दुष्प्रभावों को भी नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। अफसोस तो इस बात का है कि मोबाइल रूपी जिन्न से छुटकारा पाने के लिये कोई दवा भी नही बनी है, जिसको बच्चों को खिलाकर उनकी आदत को छुङा दिया जाये। बच्चों में ये जिन्न नित नये विकार (जैसे- जिद्दीपना, चिङचिङापन और अनिन्द्रा) उत्पन्न कर रहा है। इस विकार का उपचार यही है कि, बच्चों को मोबाइल जिन्न से दूर किया जाये। जो आज की तेज भागती दुनिया में कुछ अभिभावकों को असंभव सा लगता है किंतु यदि अभिभावक ठान लें कि हम अपने बच्चे को इस जिन्न से मुक्त करा सकते हैं, तो दुनिया की कोई भी ताकत आपके बच्चे को इस दुष्प्रभाव के जाल में नहीं फंसा सकती। 

कहते हैं, बच्चे तो कच्ची मिट्टी के समान होते हैं। उन्हें जैसा आकार दो वो वैसा ढल जाते हैं। वे अपने आसपास के माहौल से ही सीखते हैं। जैसा व्यवहार उन्हें अपने आसपास मिलता है वो वैसा ही व्यवहार करने लगते हैं। ये कहना अतिश्योकति न होगा कि, बच्चे कहना सुनने में इतने सफल नही होते जितना अनुकरण करने में सफल होते हैं। इसलिये हम बच्चों से जो चाहते हैं उसको हमें अपने व्यवहार में अमल करना होगा। दरअसल बच्चे जब देखते हैं कि अधिकतर समय मेरे अभिभावक मोबाइल में उलझे रहते हैं, तो उन्हें लगता है कि शायद मोबाइल मनोरंजन का सबसे बड़ा साधन है, इसलिए वह भी मोबाइल में खोने लगता है। कई बार तो बच्चे को मोबाइल नहीं चाहिये होता है वो अपने माता-पिता को अपनी ओर आकर्षित करने के लिए भी चिल्लाने या गुस्से जैसी हरकत करता है। परंतु हम लोग समझते हैं कि बच्चे को मोबाइल चाहिये और उसको मोबाइल देकर निश्चिंत हो जाते हैं और अनजाने में ही एक खतरनाक आदत को बढावा दे देते हैं। फिर जब बच्चे पर मोबाइल का जिन्न हावी हो जाता है तो सबसे उसकी शिकायत करते हैं। मित्रों, अपने बच्चे की कोई भी गलत आदत की शिकायत कभी भी किसी से नहीं करना चाहिये। इससे बच्चे का बालमन अत्यधिक क्रोधित होता है और वह अधिक जिद्दी होता है। अतः जो गलत आदत हम अभिभावकों की वजह से बच्चे में आई है उसे सुधारना भी हमें ही चाहिए। बच्चे का जिद्द करना या गुस्सा करना हमेशा गलत नही होता। कई बार वो अपने अभिभावक पर अपना अधिकार समझते हैं इसलिये भी करते हैं। ऐसी स्थिती में उनको डांटने या मारने से परहेज करना चाहिये। बच्चा जब ज्यादा ही नाराज या जिद्द करे तो उसे गोद में लेकर प्यार करें उसके मूड को डाइवर्ट करें। कहते हैं प्यार की ताकत से तो पत्थर भी पिघल जाता है वो तो बच्चा है, माता-पिता का प्यार भरा स्पर्ष उसके लिये सबसे बङा उपहार होता है। आज की अत्याधुनिक जीवन शैली में बच्चों को सबसे ज्यादा माता-पिता 
के प्यार और देखभाल की जरूरत होती है। ऐसे में जरूरी है कि हम अपने बच्चे के साथ अधिक से अधिक समय बिताएं। उनको कहानियां सुनायें, हो सके तो कहानियों को अभिनय के माध्यम से भी सुनायें। इससे बच्चा मोबाइल का इस्तेमाल भी धीरे-धीरे बंद कर देगा। 

अलबर्ट आइंसटाइन ने कहा है कि, “यदि आप अपने बच्चे को बुद्धीमान बनाना चाहते हैं तो उन्हे परियों की कहानी सुनाएं। यदि उन्हे और अधिक बुद्धीमान बनाना चाहते हैं तो उन्हे और अधिक परियों की कहानी सुनाएं।“

बच्चे का घरेलू कामों में सहयोग लें, इससे बच्चा आत्मनिर्भर बनेगा और कुछ व्यवहारिक चीजें भी सीखेगा। बच्चे का सहयोग लेते समय उसे ये एहसास करायें कि उसकी वजह से काम जल्दी हो गया।

मित्रों, ये भी सच है कि, कोई भी आदत एक ही बार में नहीं छूटती किंतु धीरे-धीरे बच्चो के टीवी व मोबाईल देखने के समय को कम करके इस आदत को दूर किया जा सकता है। आज समय की माँग है कि, एक दूसरे पर दोषारोपण करने की बजाय हम सब मिलकर हर बच्चे को उसका बचपन लौटाएं, मिलकर एक बेहतर कल बनायें। क्योंकि बचपन तो उस कोरी किताब की तरह है जिसपर जो चाहो लिखा जा सकता है। कहते हैं, इमारत वही मजबूत होती है जिसकी नींव मजबूत हो, यही नियम बच्चों के विकास पर भी लागू होता है। अच्छे संस्कारों से बनी बचपन की नींव सभ्य और सुसंस्कृति युवा का आधार है।

नेहरु जी के कथन के साथ अपनी कलम को विराम देते हैं और सभी युवा अभिभावकों से अनुरोध करते हैं कि, डांटने और मारने जैसी गलतियां आप लोग मत करिये क्योंकि क्रोध पूर्ण प्रतिक्रिया किसी भी समस्या का समाधान नही है खास तौर से बच्चे की आदत सुधारने में तो किसी जहर से कम नही है। अतः धैर्य के रथ पर सवार होकर सकारत्मक विश्वास के साथ बच्चे को खुशनुमा माहौल दिजिये

नेहरु जी का कथन हैः- “Children are likes buds in a garden and should be carefully and lovingly nurtured, as they are the future of the Nation and citizens tomorrow.”


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बदलता बचपन जिम्मेदार कौन????

आज के बालक भारत का भविष्य हैं









Tuesday, 31 December 2019

अभिनंदन 2020



नमस्कार मित्रों, वर्ष 2020 का नया सवेरा, नई डगर के साथ दस्तक दे चुका है।

आओ मिलकर एक नई इबारत लिखें........


सबका जीवन समभाव की सुनहरी चमक के साथ अमन प्रिय बन जाये।

सरल सहज मन से सब गले मिलें, ऊंच-नीच का भेद मिट जाये।

सुख-समृद्धी की रंगोली हर द्वार सजे।

हर किसी के दिल में मानवता की ज्योति प्रज्वलित होती रहे।

बेटियों के लिये निर्भिक आसमान हो, सबके मन में उनके लिये सम्मान उपजे।

अनेक असफलताओं के बावजूद सफलता के आसमान को छुने की ख्वाइशें बरकरार रहे।

आँखों में सजे सपने साकार हो जाये, दिल में छुपी अभिलाषाएं सच हो जाये।

स्वहित से बङा देशहित  हर किसी की ख्वाइश हो जाये।

करें संकल्प! जयहिंद वंदे मातरम् का स्वर हर दिशा में गुंजे।

आप सबका नया साल खुशियों के पुष्प से सुगंधित हो जाये।


नव वर्ष की हार्दिक शुभकामनायें 

Tuesday, 8 October 2019

Happy Dashahra

💐💐आपको एवं आपके परिवार को विजयादशमी पर्व की हादिॅक शुभकामनाएं


http://roshansavera.blogspot.com/2012/10/blog-post_4383.html?m=1

Tuesday, 1 October 2019

शास्त्री जी , एक प्रेरणास्रोत व्यक्तित्व

इस देश की माटी ने जिन रत्नों को जन्म दिया है उनमें से लाल बहादुर शास्त्री जी एक हैं। उनके जीवन से हमें प्रेणना मिलती है कि, साधारण व्यक्ति होने के बावजूद हम अपने परिश्रम और ज्ञान से असाधारण व्यक्तित्व और युगपुरुष भी बन सकते हैं। 1921  में गाँधी जी के आह्वान पर देश हित के लिए खुद को समर्पित करने  वाले शास्त्री जी साधारण परिवार से थे। 17 वर्ष की आयु में ही शिक्षा छोङकर राष्ट्रीय आंदोलन से जुङ गये। हालांकि उन्होने राष्ट्रीय विचारधाराओं वाले छात्रों के लिये स्थापित काशी विद्यापीठ में डॉ. भगवानदास , आचार्य कृपलानी, डॉ. सम्पूर्णनंद तथा श्री प्रकाश जैसे शिक्षकों के नेतृत्व में आगे की पढाई की। 

आजादी के बाद उन्होने प्रधानमंत्री के रूप में देश को सैन्य गौरव का तोहफा दिया। हरित क्रांति और औद्योगीकरण की राह दिखाई। शास्त्री जी सीमा पर खङे प्रहरियों के प्रति अत्यधिक सम्मान रखते थे। उन्होने जय जवान जय किसान का नारा दिया।  ऐसी महान हस्ती के जन्मदिन पर उनको नमन करते हुए उनका एक प्रसंग सभी पाठकों से साझा कर रहे हैं........

बात 1965 की है जब पाकिस्तान ने ये सोचकर भारत पर हमला किया था कि, 1962 की चीन युद्ध के बाद भारत कमजोर हो गया होगा। परंतु शास्त्री जी के नेतृत्व ने पाकिस्तान के मनसूबे पर पानी फेर दिया। पाकिस्तान को करारी शिकस्त का सामना करना पङा। पाकिस्तान के तात्कालीन राष्ट्रपति अयूब खान को शास्त्री जी के बुलंद हौसले का अंदाजा नही था परिणाम ये हुआ कि पाकिस्तानी हुकमरानों को भारत के आगे गिङगिङाना पङा था। 1964 में शास्त्री जी जब राष्ट्रमंडल प्रमुखों की बैठक में लंदन गये तो रास्ते में ईधन भरने के लिए उनका विमान करांची में उतरा, जहाँ अयूब खान ने उनका स्वागत किया। शास्त्री जी को देखकर अयूबखान ने अपने एक साथी से पूछा कि, क्या यही शख्स नेहरु जी का वारिस है। ये घटना बहुत ही महत्वपूर्ण थी क्योंकि अयूब खान ने 1965 में कश्मीर को छीनने की योजना बनाई थी। उसने कश्मीर में पहले घुसपैठिये भेजे और पिछे-पिछे पाक सेना भी परंतु शास्त्री जी की दूरदर्शिता ने पंजाब में दूसरा मोर्चा खोल दिया। अपने अहम शहर लाहौर का पतन देखकर अयूब खान को कश्मीर से सेना हटानी पङी। इस युद्ध से शास्त्री जी की छवी विश्व मंच पर एक शसक्त नेता के रूप में उभरी जो हर विषम परिस्थिती में भी राष्ट्र्र  गौरव बचाने में सक्षम था। पाकिस्तान को शांति समझौते की जरूरत पङी और उसने रूस से मध्यसता के लिए  सहायता मांगी। 1966 में सोवियत संघ के आमंत्रण पर शास्त्री जी समझौते के लिए ताशकंद गये, वहाँ शास्त्री जी की बुद्धीमता की वजह से पाकिस्तान  उन सभी स्थानों को लौटाने के लिए राजी हो गया था जहां-जहां तिरंगा लगा था। परंतु देश का दुर्भाग्य शास्त्री जी का दिल का दौरा पढने के कारण वहीं इंतकाल हो गया। शास्त्री जी का निधन आज भी एक रहस्य है, जो अब तक सुलझ न सका। 

सादगी और ईमानदरी का पर्याय थे शास्त्री जी, वे अपने खर्चे के लिए अपनी तनख्वाह पर ही निर्भर थे। कभी भी  अपने पद का उपयोग स्वहित के लिये नही किये। इतिहास के पन्नों में स्वर्णअक्षर से लिखा शास्त्री जी का व्यक्तित्व आज भी अमर है.......

लालों में वो लाल बहादुर 
भारत माता का प्यारा था,
नहीं युद्ध से घबराता था,
विश्व शांती का दिवाना था,
इस शांति की बेदी पर 
उसे ज्ञात था मर मिट जाना






Friday, 13 September 2019

हिन्दी दिवस की हार्दिक शुभकामनायें

 हम सबकी अभिलाषा है, विश्व शिखर पर हिन्दी का सम्मान हो।
हर कण में बसी हिंदी पर , हम सबको अभिमान हो।
आओ मिलकर  प्रण करें, समस्त विश्व में हिन्दी की जय जयकार हो।
🙏हिंदी दिवस की हार्दिक हार्दिक शुभकामनायें🙏

मातृभाषा पर मेरे पूर्व के विचारों को पढेंः--

Sunday, 1 September 2019

गंणेश चतूर्थी की हार्दिक शुभकामनाएं

नमो गणपतये। नमः प्रमथपतये। श्री वरदमूर्तये नमो नमः। 
मित्रों, महाधिपति महानायक मंगलमूर्ती गंणेश जी, जिनका पूरा परिवार सबका मंगल करते हुए, सुख शांति और आनंद बरसाता है।ऐसे सामूह शक्ति के प्रतीक गणनायक को कोटी कोटी नमन करते हुए आप सभी को गंणेश चतूर्थी की हार्दिक शुभकामनाएं🙏 


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धन्यवाद 🙏