Saturday, 1 October 2016

एक खत, माननीय प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी जी और माननीय रेल मंत्री सुरेश प्रभु जी को




माननीय प्रधानमंत्री मोदी जी एवं माननीय रेल मंत्री सुरेश प्रभु जी
नमस्कार,

विषयः- स्वच्छता अभियान 


सर्वप्रथम आदरणीय प्रधानमंत्री जी  एवं आदरणीय रेल मंत्री जी आप दोनों को कोटी-कोटी धन्यवाद। वर्तमान में देश की दशा और दिशा को स्वच्छ वातावरण की ओर मुखारित करने में आपकी पहल सराहनीय है। ये अभियान निःसंदेह आपके संरक्षण में भारत को स्वच्छता के शिखर पर ले जायेगा  जनभागीदारी से स्वच्छता की ऐसी इबारत लिखेगा कि विश्व भी इसका उदाहरण देगा। परंतु कुछ ऐसे बिंदु भी हैं  जहाँ जनभागीदारी के साथ सरकारी महकमों को भी दृढता से आगे आना होगा। जैसे कि, इक्ठ्ठे किये गये कचरे का समय पर सुनियोजित निपटारा एवं अस्वच्छ क्षेत्रों के प्रतिनीधियों को इस अव्यवस्था का जिम्मेदार ठहरा कर। 


माननीय मोदी जी, हमारे भारत में ही सिक्किम एक ऐसा राज्य है जहाँ सर्वत्र स्वच्छता दृष्टीगोचर होती है। यदि सिक्किम की बात की जाये तो, ये ज्ञात होता है कि, वहाँ कई ऐसे कानून बनाये गये हैं जिसे तोङने पर दंड लगता है। सिक्किम जैसी कानून व्यवस्था  पूरे देश में लागू की जा सकती है क्योंकि हमारे देश में कुछ ऐसी मानसिकता भी है जिनकी चेतना सिर्फ कानून के डर से ही जागृत होती है। ऐसे में मेरे मन में एक विचार है, जिसे आप अपने अनुसार अम्लीजामा पहनाये तो ये स्वच्छ मिशन चीरकाल तक स्थायी रह सकता है और भविष्य में इस प्रयोजन हेतु जागरुकता अभियान चलाने की आवश्यकता न होगी क्योंकि ये एक व्यवस्था बन जायेगी। 


इसकी शुरुवात पार्षद एवं सरपंच से कर सकते हैं, जिस पार्षद एवं सरपंच के एरिया में साफ-सफाई न हो उसकी सरकारी निधी में कटौती कर दी जाये। इसका असर ये होगा कि हमारे जनप्रतिनिधी घर -घर जाकर लोगों को स्वच्छता के प्रति जागरुक करेंगे जैसे वोट मांगने जाते हैं। दरअसल हर शहर में ऐसी कई झुग्गी - झोपङिया हैं जहाँ स्वच्छता की सबसे ज्यादा आवश्यकता है किंतु वहाँ हमारे जनप्रतिनिधी सिर्फ चुनाव के समय ही जाते हैं। माननिय रेल मंत्री जी आपको इस खत में शामिल करने का आशय भी यही है कि कई शहरों के शुरु होने से पहले रेल की पटरियों के बिलकुल किनारे अनगिनत अवैध झुग्गियां हैं जहाँ गंदगी का विकराल रूप देखा जा सकता है जिसका निवारण रेल मार्ग में पङने वाले सभी ग्राम प्रधान और निकटतम् क्षेत्र के जनप्रतिनिधी के द्वारा ही संभव हो सकता है। स्टेशन भले ही साफ हो लेकिन जो बाहर से आत है उसे  स्टेशन से पहले  बाहर का एरिया ही दिखता है  "First Impression is the last Impression" के आधार पर उसके मन में शहर की नकारात्मक तस्वीर ही बनती है। यदि उदाहरण के तौर पर भोपाल स्टेशन की बात करें तो 2017 में यहाँ भव्य स्टेशन बनने का प्रावधान है किंतु मुम्बई और दिल्ली से जाने वाली गाङियों को भोपाल के बाहर की ऐसी तस्वीर दिखती है जहाँ गंदे पानी के भरे गढ्ढे , झुग्गियों का समूह और कचरे का साम्राज्य है। 


दूसरा विचार है कि, हमारे सभी सरकारी और गैरसरकारी संस्थानो में ये नियम बना दिया जाये कि जिन कर्मचारी के घर के आसपास गंदगी रहेगी उनका सालाना भत्ता रोक दिया जायेगा। जब कंपनियां हेलमेट और सीट बैल्ट के लिये कढाई से पेश आती हैं तो इस पर भी कङा रुख कर सकती हैं, आखिर साफ-सफाई का भी ताल्लुक जीवन से जुङा हुआ है। अनेक जान लेवा बिमारियां गंदगी की ही सौगात है। सभी सरकारी एवं गैरसरकारी विद्यालयों के द्वारा बच्चों और माताओं को  सरस्वती शिशु मंदिर की तर्ज पर यानी पालक संपर्क के माध्यम से समझाया जा सकता है। विद्यालयों में बच्चों द्वारा फैलाई गंदगी पर उन्हे  आर्थिक दंड की बजाय अध्ययन का कुछ अतिरिक्त कार्य देना चाहिये। 

जिस तरह स्वच्छ विद्यालय, शहर और कार्यलयों की जानकारी दी जा रही है उसी प्रकार देश के उन क्षेत्रों को भी सबके समक्ष लाया जाये जहाँ गंदगियों का अम्बार है। इस अभियान के तहत स्वच्छता पर पुरस्कार वितरण उत्तम और मानवीय पहल है परंतु  कुछ कढवी दवाईयों की भी दरकार है। 

गाँधी जयन्ती और लाल बहादुर शास्त्री जी की जयन्ती पर हार्दिक बधाई के साथ स्वच्छता अभियान की  वर्षगांठ पर हार्दिक बधाई , ये कामना करते हैं कि बहुत जल्द हमारा देश "स्वच्छ भारत स्वस्थ भारत" के रूप में विश्व में पहचाना जाये और गाँधी जी का सपना साकार हो। 


धन्यवाद
अनिता शर्मा 
दृष्टीदिव्यांग हेतु कार्यरत 



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