Tuesday, 18 November 2014

परिवार जिंदगी का आधार है


हमारी सुरक्षा का महत्वपूर्ण घेरा परिवार होता है, जो बाहर ( परि) के आक्रणम (वार) से हमें बचाता है। ये ऐसा समूह है जहाँ प्यार और सपोर्ट के अनुभवों की चेन में हमसब बंधे होते हैं।  हम सब की खुशी का आधार है परिवार। परंतु  एक सच्चाई ये भी है कि जब हम पारिवारिक जीवन में प्रवेश करते हैं तो कई समस्याओं का भी सामना करना पङता है। सबसे प्रमुख समस्या होती है आर्थिक जिम्मेदारी जिसकी वजह से कई बार परिवार के पुरूष सदस्य को घर से दूर रोजगार की तलाश में जाना पङता है, जिसे खास तौर से मध्यम वर्गीय या निम्नवर्गीय परिवारों को अधिक झेलना पङता है। वैसे यदि गहराई से विचार किया जाये तो आर्थिक समस्या इतनी बङी भी नही है कि, जो परिवार की खुशहाली को ग्रहंण लगा सके क्योंकि भौतिक सुविधा की कोई सीमा नही है वो तो हमारे ऊपर निर्भर है कि हम किसे और कितना महत्व दे रहे हैं। आज भले ही भौतिकवाद का जमाना हो किन्तु जीवन की वास्तविक खुशहाली आपसी प्रेम और सहयोग पर ही अंकुरित होती है।

प्रसिद्ध दार्शनिक अरस्तु का कहना है कि, "परिवार किसी भी राज्य की पहली ईकाइ है। ये राज्य के विकास की पहली मंजिल का पङाव है। परिवार मनुष्य की शारीरिक और मानसिक आवश्यकताओं की पूर्ती करने वाली पहली संस्था है।" 

मनोवेज्ञानिकों की यदि माने तो कई ऐसे परिवार हैं जो कम धन में भी खुश हैं उनके बच्चे भी अपनी प्रतिभा के बल पर अपना और अपने परिवार का नाम रौशन करते हुए सुखी और संपन्न हैं क्योकि उनके पास संतोष का पंरम धन है। किसी ने सच कहा है कि 'संतोषी सदा सुखी'. वहीं दूसरी ओर कई ऐसे साधन सम्पन्न परिवार हैं जहाँ समस्त भौतिक साधन हैं फिरभी वे अवसाद में चले जाते हैं। वास्तव में परिवार की खुशहाली तो चार स्तंभ पर टिकी होती है, वो हैं प्यार, विश्वास, सम्मान और आपसी समझदारी। परिवार के इन आधारों की नींव जितनी मजबूत होती है उतनी ही मजबूत रिश्तों की भी डोर होती है। जिस तरह पाँचों अँगुली एक बराबर नही होती फिर भी एक साथ मिलकर जब मुठ्ठी बन जाती है तो अच्छों अच्छों की छुट्टी कर देती है, उसी प्रकार परिवार में सभी लोगों की विचारधारा एक नही होती किन्तु जब वे परिवार के सुर में अपना विचार व्यक्त करते हैं तो दुनिया की कोई भी ताकत उनसे उनकी खुशी नही छीन सकती। परिवार तो संगीत की तरह है जिसके कुछ स्वर नीचे तथा कुछ स्वर ऊंचे लगते हैं लेकिन इसी संगीत के मिल जाने से सुंदर गीत बनता है। परिवार तो ऐसा मधुर केंद्र बिन्दु है जहाँ व्यक्ति, जिंदगी की जद्दोज़हद और तनाव को बच्चों की किलकारी में भूल जाता है। अपने अभिभावक से मिले स्नेहशील आशिर्वाद के साथ पुनः जिंदगी की दौङ में शामिल हो जाता है।  

"Family is like branches on a tree, we all grow in different directions, yet our roots remain as one."

परिवार तो ईश्वर का सुंदर वरदान है जहाँ जिंदगी की शुरुआत प्यार और अपनेपन के पोषण से पल्लवित होती है। खुशहाल परिवार समाज और देश को भी सुखी और सम्पन्न बनाता है। मनु संहिता पर आधारित  हमारी भारतीय संस्कृति और सभ्यता में भी परिवार को सर्वोपरी माना गया है। परंतु यदि आज के परिपेक्ष्य में  देखें तो हर तरफ, हर जगह बेशुमार इंसान नजर आते हैं फिर भी कहीं न कहीं परेशानियों और तनहाईयों का शिकार है इंसान, ऐसे में मदर टेरिसा का कहना है कि, What can you do to promote word peace? Go home & love your Family. आज भले ही वक्त के तराजू पर एकल परिवार का पलङा भारी हो गया हो फिर भी परिवार के महत्व का पलङा सदैव भारी रहेगा क्योंकि जिंदगी का आधार परिवार ही है। 

किसी भी बच्चे के लिये परिवाार तो वो प्रथम पाठशाला है जहाँ बच्चा आपसी सहयोग और सम्मान का ककहरा पढता है। जिंदगी का पहला कदम अपनो के दुलार और आशीष के साथ आगे बढाता है। मेरी नजर में परिवार तो वो सुंदर कल्पना है जहाँ खून के रिश्ते ही नही वरन दोस्त और पङोसी भी सब मिलकर परिवार की तरह  रहते हुए सहयोग और भाईचारे के पैगाम से चारों दिशाओं को गुंजायमान करते हैं। परिवार और दोस्त तो वो छुपा हुआ खजाना हैं, जो हमें आंनदित करते हैं और धनवान बनाते हैं। परिवार तो किसी परी की जादू की छङी की तरह है, जिसके जादू से जिंदगी की सभी बाधाएं और मुश्किलें छुमंतर हो जाती हैं। परिवार में जो खुशी मिलती है वो अमुल्य है उसका कोई विकल्प भी नही होता।    

सच्चाई तो यही है कि,  "Family is one of the strongest words any one can say because the letter of family means father & mother I love you." 

Thank you God for my Family. Keep them safe.

2 comments:

  1. Aapne jo image lagayi hai use dekhkar main apni family imagine kar paa raha hun.... Parivaar kii mahatta parivaar se door rah kar aur bhi samajh aati hai ... ek abehad achha lekh . Mother Teresa ka mesaage bhi bahut powerful hai.
    Thanks.

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  2. श्रेष्ठ रचना.
    आभार.

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