Friday, 13 March 2026

Inspiring Story ( Safe Pinki Mangal)

मंजिले भी जिद्दी है, रास्ते भी जिद्दी हैं।
देखते हैं कल क्या होगा , हौसले भी तो जिद्दी हैं।
मित्रों, आज हम एक ऐसी महिला से आपका परिचय करवाते हैं जिसका हौसला जिद्दी है। इंदौर की एक  गृहणी जो गांव के माहौल में पली बढी और 12-14 वर्ष की उम्र से ही  विभिन्न प्रकार के खाना बनाने की कोशिश करती।   सामुहिक परिवार में जब मां या भाभी रसोई में आने को मना कर देती तो अङोस-पङोस के घरों में जाकर उनके लिए कुछ नया खाना बनाने की कोशिश करती। पिंकी मंगल का यही शौक आज उनकी पहचान बन गई है। हालांकि ये पहचान बनना इतना आसान नही था। 18 वर्ष की उम्र में शादी हुई शादी के बाद रेटिनाइटिस पिगमेंटोसा बिमारी के कारण आंखो की रौशनी कम हुई और कुछ दिनों बाद सबकुछ दिखना बंद हो गया।

गौरतलब है कि, (रेटिनाइटिस पिगमेंटोसा एक दुर्लभ, आनुवंशिक नेत्र रोग है, जो रेटिना को नुकसान पहुंचाता है। यह रॉड और कोन कोशिकाओं के धीरे-धीरे खराब होने के कारण होती है, जिससे रात में कम दिखना, दृष्टि का दायरा कम होना और अंततः पूरी तरह दिखना बंद हो जाना।)

कहते हैं, अगर आप उन बातों और परिस्थितियों की वजह से चिंतित हो जाते हैं , जो आपके नियंत्रण में नही हैं, तो इसका परिणाम समय की बरबादी और भविष्य का पछतावा है। पिंकी ने अपनी वर्तमान स्थिती पर रोने की बजाय अपने शौक पर संजिदगी से काम करना शुरु कर दिया। सफर आसान नही था फिर भी अपने हौसले और परिवार के सहयोग से बिना किसी प्रशिक्षण से नये-नये व्यंजनों को बनाने लगी।

"इस दुनिया में असंभव कुछ भी नही है, हम वो सब कर सकते हैं जो हम सोच सकते हैं और हम वो सब सोच सकते हैं जो आज तक नही सोचे हैं"

एक दिन पिंकी को पता चला कि, गोल्डन आई शैफ नाम की संस्था दृष्टीबाधितों के लिए कुकिंग प्रतियोगिता का आयोजन करवाती है। ये संस्था अल्प दृष्टीबाधित और पूर्ण दृष्टीबाधित दो कैटेगरी में प्रतियोगिता का संचालन करती है। पिंकी ने इस प्रतियोगिता में पूर्णतः दृष्टीबाधिता की केटेगरी में हिस्सा लिया। पहली प्रतियोगिता में स्पाउट्स को नये तरिके से बनाया, अगले वर्ष इंदौरी उसलपोहा, फिर दाल बाटी चूरमा, मखाने की भेल और भुट्टे का किस ये सभी व्यंजन आयोजक की थीम के अनुसार बनाये गये। वर्ष 2021 से शुरु हुआ ये सफर प्रत्येक वर्ष पुरस्कार से सुसज्जित होता हुआ सोनी टीवी पर आयोजित मास्टर सैफ कुकिंग प्रतियोगिता तक पहुंच गया। 

8 जनवरी 2026 को सोनी टीवी पर आयोजित मास्टर सैफ कुकिंग प्रतियोगिता में 6 राउंड पास करती हुई पिंकी मंगल अंर्तराष्ट्रीय स्तर पर ऊपर के 25 लोगों में चयनित हुई। पिंकी की उपलब्धी पर देश के प्रतिष्ठित जज रनवीर बुरार, विकास खन्ना एवं कुनाल कपूर ने बहुत तारीफ की।

अगले राउंड में तंदूरी पकवान बनाना था, परंतु तंदूर पर काम पहले न करने की वजह से समय पर पकवान नही बना पाई। सामान्य दृष्टीसक्षम लोगों के बीच एक अकेली दृष्टीबाधित महिला का 7 राउंड तक पहुंचना भी एक महत्वपूर्ण उपलब्धी है। इतिहास लिखने के लिये कलम की नही हौसले की जरूरत होती है। ये कहना अतिश्योक्ति न होगा कि भविष्य में पिंकी मंगल अपने हौसले से अनेक कुकिंग प्रतियोगिता को जीतकर इतिहास रचेगी।

ए पी जे कलाम साहब का कथन हैः- "हम सबमें समान प्रतिभा नही है लेकिन हम सबके लिए समान अवसर है हमारी प्रतिभा को विकसित करने के लिए"

जिंदगी की खूबसूरती इसी पर है कि आप उसे कैसे देखते हैं। पिंकी अपने हुनर के बलपर आज समाज में एक विशेष पहचान बना चुकी है। अब तक आठ पुरस्कार प्राप्त करके कई लोगों के लिए प्रेरणास्रोत है। गांव में पली-बङी, शिक्षा का लाभ ज्यादा नहीं मिला परंतु उसने अपने शौक को जिवन में आगे बढने का रास्ता बना लिया है।
 
जीतुंगी मैं यह मेरा वादा है, कोशिश मेरी सबसे ज्यादा है। 
हिम्मत भी टूटे तो भी नही रुकुंगी, मजबूत मेरा इरादा है।

पिंकी, अपने इन्ही इरादों से आगे बढती रहो। हमसब आपके उज्जवल भविष्य की कामना करते हैं और आपके ज़ज्बे का अभिनंदन करते हैं। निरंतर नये-नये व्यंजन बनाते हुए एक नया इतिहास लिखो, ढेर सारी शुभकामनाएं। ये कहना अतिश्योक्ति न होगा कि, सफलता का आशिर्वाद केवल उन्हे ही मिलता है, जिन्होने कभी संघर्ष के कदमों को स्पर्श किया हो।


एक निवेदन दिये गये विडियो लिंक को अवश्य देखें और ब्लॉग पर कमेंट के माध्यम से पिंकी मंगल का हौसला अवश्य बढायें



सोनी टीवी का विडियो 

धन्यवाद 
जयहिंद वंदे मातरम्






 

No comments:

Post a Comment