Wednesday, 10 June 2015

रक्तदान है महादान, नही कोई आम दान




विज्ञान के इस आधुनिक युग में हम मंगल पर पहुँच चुके हैं। विश्व में अनेक ऐसे कीर्तिमान बना चुके हैं जो हमारी जिंदगी को पहले से बेहतर बनाते हैं। परंतु विकास के इस दौर में आज भी  हम रक्तदान करने में संकोच करते हैं, जिसके कारण कई लोग सही समय पर रक्त की व्यवस्था के अभाव में असमय ही काल के मुहँ में चले जाते हैं।  ऐसा नही है कि हमारा समाज पूरी तरह से उदासीन है। रक्तदान के क्षेत्र में बहुत कुछ अच्छा भी हो रहा है फिरभी वास्तविकता ये है कि, जिस तरह जरूरत है उसके अनुसार जागरुकता नही है। आज भी अनेक लोग रक्तदान करने में डरते हैं। विश्व स्वास्थ संघठन  के अनुसार  भारत में हर साल लगभग एक करोङ युनिट रक्त की जरूरत होती है लेकिन उप्लब्धता केवल 75 लाख युनिट की हो पाती है। सभ्यता के इस दौर में आज भी कई लोगों को रक्त खरीदना पढता है और उससे भी बङी विडंबना ये है कि पैसे देने के बावजूद भी सही समय पर रक्त नही मिल पाता और व्यक्ति की असमय मृत्यु हो जाती है


रक्तदान हेतु बढावा देने के लिये विश्व स्वास्थ संघटन ने 14 जून 1997 को विश्व रक्तदान दिवस मनाने की घोषणा की, जिसका उद्देश्य था कि, लोग रक्तदान के महत्व को समझें और अधिक से अधिक लोगों के जीवन को रक्तदान से आलोकित करें। जागरुकता की ये शुरुवात 14 जून से इसलिये शुरु हुई क्योंकि इसी दिन  रक्त में अग्गुल्युटिनिन की मौजूदगी के आधार पर रक्त का अलग-अलग रक्त समूहों - ए, बी, ओ में वर्गीकरण कर चिकित्साविज्ञान में अहम योगदान देने वाले कार्ल लैण्डस्टाइलर का जन्म हुआ था। कार्ल लैण्डस्टाइलर एक प्रसिद्ध वैज्ञानिक थे, भौतिक तथा जीवविज्ञान के क्षेत्र में कार्ल लैण्डस्टाइलर के  प्रयासों की वजह से कई खोज हुई है।  अनेक सम्मानो से सम्मानित कार्ल लैण्डस्टाइलर को 1930 में नोबल पुरस्कार से भी सम्मानित किया गया था। चिकित्सा विज्ञान के क्षेत्र में उनके अहम योगदान की वजह से ही उनके जन्मदिन को यानि की 14 जून को रक्तदान दिवस के रूप में मनाया जाता है। इस मुहिम के पीछे मकसद विश्वभर में रक्तदान की अहमियत को समझाना भी है।



मित्रों, आज भी कई लोग रक्तदान करने में हिचकिचाते हैं, सोचिये यदि जब हम किसी को रक्तदान करने में संकोच करेंगे तो, हम ये कैसे उम्मीद लगा सकते हैं कि जरूरत के वक्त लोग हमको रक्त देगें। यदि हम विज्ञान पर विश्वास करें तो उसके अनुसार, रक्तदान हर वह व्यक्ति जिसकी उम्र 16 से 60 साल के बीच और वजन 45 किलोग्राम से अधिक होजिसे एचआईवी(HIV), 
हैपिटाइटिस बी” या सी” (Hepatitis B,C) जैसी बीमारी न हुई होवह रक्तदान कर सकता है। एक बार में 350 मिलीग्राम रक्त दिया जाता हैउसकी पूर्ति शरीर में चौबीस घण्टे के अन्दर हो जाती है और गुणवत्ता की पूर्ति 21 दिनों के भीतर हो जाती है। प्रत्येक स्वस्थ व्यक्ति तीन माह में एक बार रक्तदान कर सकता है। एक व्यक्ति के रक्तदान से तीन लोगों की जिंदगियां बचाई जा सकती है। स्वस्थ शरीर में रक्त बनने की प्रक्रिया स्वाभाविक है इसके लिये कोई अलग से खर्च नही करना पडता तो फिर प्राकृतिक तौर पर प्राप्त रक्त को दान करने में कैसा संकोच! 


यदि मध्यप्रदेश में रक्तदान के प्रतिशत की बात करें तो संतोषप्रद परिणाम नही है क्योंकि अभी हम शत-प्रतिशत रक्तदान आँकङों से दूर हैं। ऐसी ही समस्याओं को दूर करने के लिये मध्य प्रदेश समेत कई शहरों में अनेक संघठन कार्य कर रहे हैं। हमारे शहर इंदौर में भी कई संस्थायें इस रक्तदान के यज्ञ में अपने सहयोग की आहुती दे रही हैं। इन संस्थाओं में एक संस्था है "अक्युब रक्त सेवा" 
जिसकी नीव एक कम उम्र के युवा ने रखी। जिस उम्र में कई युवा अपनी खुशियों को ही सर्वोपरी मानते हैं, उस समय अक्षय ने रक्तदान का संक्लप लिया 18 वर्ष से भी कम उम्र में अक्षय ने पहली बार 8 मार्च 2014 को रक्तदान किया। किसी दूसरे की जिंदगी को रक्त देकर उसे ऐसी खुशी का एहसास हुआ कि वो अब निरंतर इसी प्रयास में रहता है कि रक्त का अभाव किसी को भी न हो। इस मुहीम के लिये अक्षय ने लोगों को जागरूक करना शुरु किया। अक्षय को इस कार्य हेतु कलेक्टर समेत कई संस्थाओं ने सम्मानित भी किया है। 

If you're a blood donor, you're a hero to someone, somewhere, who received your gracious gift of life. 

दोस्तों, कहने का आशय ये है कि यदि हम सब अपने-अपने क्षेत्र में ऐसे ही प्रयास करते रहें तो कई लोगों के जीवन को असमय काल में जाने से बचाया जा सकता है। अपने जन्मदिन पर रक्तदान शिविर लगाकर लोगों को इस कार्य हेतु प्रेरित कर सकते हैं। देशभर में रक्तदान हेतु नाको, रेडक्रास जैसी संस्थायें कार्य कर रही हैं किन्तु ये संस्थाएं तभी सफल होंगी जब हम स्वयं रक्तदान हेतु सामने आयेंगे।आज हम सब शिक्षित हैं और सभ्य समाज के नागरिक हैं, जो सामाजिक ताने-बाने की अहमियत को समझते भी हैं। इसलिये मित्रों हम सबकी नैतिक जिम्मेदारी है कि, अपने जीवन को सार्थकता प्रदान करें। रक्तदान के यज्ञ में अपनी सजगता की आहुति देकर लाखों लोगों को जीवन दान दें, क्योंकि रक्तदान तो जीवन दान है। 
 
If you donate money, you give food But If you donate blood you give life
धन्यवाद 

कृपया इस लेख को भी अवश्य पढें 
अंगदान जीवन दान 




 




2 comments:

  1. मैंने पहले भी रक्त दान किया है और आगे भी करता रहूँगा। इस लेख के लिए धनयवाद।

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  2. Anita जी अपने रक्तदान कीजिए पर अच्छा लेख लिखा, जो सचमुच मैं रक्तदान करने के लिए प्रेरित करेंगा. मैंने इस विषय पर शानदार - blood donation Hindi Slogan लिखे... इसलिए शेयर कर रहा हु. फिर एक बार धन्यवाद.

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