Thursday, 31 March 2016

सेल्फी का जुनून

आजकल एक शब्द इस तरह से कॉमन हो गया है कि जिसको देश की सीमाएं या भाषाओं के बंधन भी नही रोक सकते। जी हाँ दोस्तों आप सही समझे वो शब्द है सेल्फी। सेल्फी लेने का ट्रेंड इन दिनों खूब चल रहा है। सेलिब्रिटी से लेकर आम लोग सभी सेल्फी के दीवाने हो गए हैं। हद तो 29 मार्च 2016 को हो गई जब मिश्र में एक व्यक्ति ने प्लेन हाई जेकर के साथ सेल्फी ली। सैल्फी आज फैशन का पर्याय बन गया है ये कहना अतिश्योक्ति न होगा कि, सेल्फी लेना किसी सनक से कम नही है। प्रसिद्धी पाने का सस्ता और घटियां तरीका बन गया है। लगभग 2013 के बाद से तो ये एक जुनून बन गया है। 2013 में सेल्फी को ऑक्सफोर्ड ने वर्ड ऑफ द इयर बना दिया था। कई लोग अजीबो गरीब सेल्फी लेकर यू ट्यूब पर अपलोड कर देते हैं और विडियो वायरल होने पर अपने ऊपर फक्र करते हैं। खुद को पापुलर करने की ये सोच बहुत खतरनाक है जिसमें कई लोगों को तो अपनी जिंदगी से भी हाँथ धोना पङता है। सिडनी हार्बर में तो एक बोट पर दो पर्यटक सेल्फी लेने को लेकर आपस में झगङ पङे।

एक बार एक महिला का कार एक्सीडेंट हो गया वो कार से बङी मुश्किल से बाहर निकली चेहरे पर चोट लगी थी खून बह रहा था, कार में से धुआं निकल रहा था लेकिन वो महिला बाहर आते ही अपने चोट लगे चेहरे की सेल्फी लेने लगी और तो और कार के साथ भी बङी स्टाइल से सेल्फी ले रही थी। एक्सीडेंट होने पर उपचार की बजाय सेल्फी लेना किसी सनक से कम नही है। बॉलीवुड भी कैसे पिछे रहता तो वहाँ तो सेल्फी पर पूरा गाना ही बनाकर जनता को उत्साहित किया जा रहा है। ले ले भईया सेल्फी ले ले।

हांगकांग के तीन दोस्तों ने 1135 फुट ऊँची इमारत के शिखर पर चढकर सेल्फी ली। सेल्फी के चक्कर में कई नये व्यपार भी बढ गये जो इस सनक को बढावा देने के लिये आग में घी का काम कर रहे हैं। हम सबने एक वाक्य सुना होगा कि, कानून के हाथ लंबे होते थे लेकिन आज स्मार्ट होती इस दुनिया में फोन के हाथ भी लंबे हो सकते हैं। कई तरह की सेल्फी स्टिक आज बाजार में आ चुकी है। यहां तक कि टाइम मैगज़िन ने सेल्फी स्टिक को 2014 के सबसे बढ़िया आविष्कारों में से एक बताया है। सेल्‍फी क्लिक करने के शौकीन लोगों के लिए सेल्‍फी ड्रोन कैमरा भी बनाया गया है। सेल्‍फी स्टिक' पर मोबाइल को लगाकर वाइड एंगल में सेल्‍फी को क्लिक किया जाता है। वैसे सेल्फी स्टिक का इतिहास बहुत पुराना है किन्तु जिस तरह आज सेल्फी जुनून की हद हो गई है तो लगता है कि स्टिक भी अभी आई होगी। लेकिन स्टिक का आविष्कार हिरोशी यूएदा ने 1980 में किया था। यूएदा उस समय कैमरा निर्माता कंपनी मिनोल्टा के लिए काम करते थे। काम के दौरान ही उन्‍होंने सेल्फी स्टिक को विकसित किया। यूएदा खुद फोटोग्राफी के शौकीन थे।

युक्रेन के कुछ सैनिकों ने तो तोप में लगी बैरल गन को ही स्टिक बना लिया वे बैरल गन पे मोबाइल लगाकर सेल्फी ले रहे हैं और विडियो बना रहे हैं। इंटरनेट पर एक ऐसी सेल्फी भी दिखी जिसको लोगों ने भूत कहा और अपने डर का जिक्र किया। इस भूतीया सेल्फी में एक कपल मुस्कराता नज़र आ रहा है लेकिन इसमें चौकाने वाली बात ये है कि, कपल के पीछे मिरर है और मिरर के रिफलेक्शन में भी महिला का चेहरा सामने ही दिख रहा है। इस सेल्फी को लेकर कई सवाल उठ रहे हैं कि, क्या ये वाकई भूतीया है या किसी फोटो शॉप का कमाल।

हमारी राजनीति में सेल्फी का चलन प्रधानमंत्री के कारण ही बढ़ा है। मकसद तो सिम्पल था कि मतदान की नीली स्याही वाली उंगली दिखाना या बेटी के साथ सेल्फी लेकर प्रधान मंत्री नरेन्द्र मोदी जी को भेजना। अपने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी जी तो कई बार अपने फैन के साथ सेल्फी ले चुके हैं। अमरीका के राष्ट्रपति भी जहां जाते हैं सेल्फी ले आते हैं। पहाड़ हो, ग्लेशियर हो, इंसान हो, मेमोरियल हो, हर जगह वे सेल्फी ले आते हैं। ऐसा लगता है कि, अब लोग इमारातों और शहरों को देखने नहीं जाते बल्की खुद को देखने जाते हैं। ताजमहल की खूबसूरती भी इस सेल्फी कल्चर के आगे कम हो गई है। पहले लोग ताज के सामने जाते ही अवाक हो जाते थे। अब ताज को देखते ही पीठ फेर लेते हैं। सेल्फी खिंचने लगते हैं। 


आज स्मार्ट फोन के साथ सेल्फी जुनून इस कदर स्मार्ट हो रहा है कि, छोटे-छोटे बच्चे भी इसकी गिरफ्त में आ गये हैं और वक्त से पहले उनका बचपन कुछ ज्यादा ही स्मार्ट हो रहा है। सेल्फी का जुनून जिस तरह आज वायरल हो रहा है, तो वो दिन दूर नही जब लोग किसी के ज़नाजे के साथ सेल्फी लेने लगेगें या फांसी की सजा पाये व्यक्ति से उसकी अंतिम इच्छा पूछी जाये तो वो कहेगा फांसी पर लटकते समय मुझे सेल्फी लेना है क्योंकि सेल्फी का बढता क्रेज और प्रसिद्धी का ये नया अंदाज लोगों में एक ऐसी मानसिकता का जहर घोल रहा है जिसकी चपेट में बच्चे, बुढे और जवान सभी आ रहे हैं। मेरा मानना है कि, बीच सङक पर व्यस्त ट्रॉफिक के बीच, समुन्द्र के किनारे, ऊची पहाङियो पर या चलती ट्रेन से लटक कर सेल्फी लेना भी किसी खुदकुशी से कम नही है। अप्रैल महीने में नवी मुंबई में तीन छात्रों ने सेल्फी के चक्कर में जान गंवा दी। आगरा के पास तीन छात्र रेल के नीचे आ गए। ताजमहल देखने निकले थे लेकिन अपनी कार रोकी और रेलवे ट्रैक पर दुस्साहसी सेल्फी लेने का हौसला कर बैठे। छात्रों की कोशिश थी कि ट्रेन के बैकग्राउंड में सेल्फी लें लेकिन ट्रेन बहुत पास आ गई और दुर्घटना हो गई। मई महीने में रूस में एक महिला ने सेल्फी लेते वक्त खुद को गोली मार ली। वो कनपटी पर बंदूक तान कर सेल्फी लेना चाहती थी। ट्रिगर दब गया और जीवन ही समाप्त हो गया। सेल्फी की वजह से बढते एक्सीडेंट को देखते हुए महाराष्ट्र में तो समुन्द्र के किनारे सेल्फी लेने पर बैन लगा दिया है।


आज संवेदनाहीन होती सेल्फी कुछ अलग ही नजर आ रही है। पश्चिमी देशों में सेल्फी का रुझान बढ़ने के बाद इन देशों में युवा अजीबोगरीब तरीके से खुद की फोटो ले रहे हैं। इन युवाओं की सेल्फी सनक कुछ इस तरह नजर आ रही है जिसमें कुछ युवा सड़क किनारे फुटपाथ, पार्क, बेंच पर सोए लोगों के साथ सेल्फी ले रहे हैं और इसे सोशल नेटवर्किंग साइट्स पर अपलोड कर रहे हैं। वक्त रहते सेल्फी के वायरस को वायरल होने से रोकना चाहिये क्योंकि ये महज एक सनक है जो प्रगतिशील समाज की उन्नति के लिये सबसे बङी बाधा बनकर उभर रही है। मित्रों, सेल्फी को जिवंत रखें ऐसा न करें कि उसपर माल्यार्पण हो जाये। 
धन्यवाद
अनिता शर्मा
Mail ID - www.voiceforblind@gmail.com





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