Sunday, 4 September 2016

गणेश चतुर्थी विशेष


हिन्दु धर्म में किसी भी शुभ कार्य से पहले निर्विघ्नं देव गणेंश जी की पूजा अर्चना प्राचीन काल से प्रचलित है। आज भले ही हम सब डिजिटल इंडिया के तहत आधुनिकता के परिवेश में विकास के सोपान पर कदम दर कदम बढ रहे हैं, फिरभी गणेश जी की अर्चना आज भी उतनी ही प्रासंगिक है जितनी पुरातन काल में थी। वर्तमान में तो गंणेश चतुर्थी का त्योहार पहले से भी अधिक धूम-धाम से मनाते हैं। लोकमान्य बाल गंगाधर तिलक ने इस पर्व को स्वतंत्रता के दौरान  राष्ट्रीय त्योहार बना दिया था, जिसका मकसद था लोगों में देशभक्ती का जज़्बा जगाना।

शुभता और मंगल फल प्रदान करने वाले गंणेश जी का त्योहार इस वर्ष 5 सितंबर को मनाया जायेगा। पुराणों में गणेंश जी के आठ अवतारों का वर्णन हैः- वक्रतुंड, एकदंत, महोदर, गजानन, लंबोदर, विकट, विघ्नराज एवं धूम्रवर्ण। गणेंश जी के सभी अवतार विशेष सिद्धी दायक है। शुभ-लाभ, ऋृद्धी-सिद्धी प्रदायक विघ्ननाशक गणेंश जी ऐसे देवता हैं, जो सर्वमान्य एवं सार्वभौम्य हैं। विघ्नहर्ता गंणेश जी का वंदन करते हुए श्रद्धा पूर्वक शत् शत् नमन करते हैं। भगवान शकंराचार्य ने कहा है--

यमेकाक्षरं निर्मलं निर्विकल्पं
गुणातीतमानन्दमाकारशून्यम्।
परं पारमोंकारमामनायगर्भ
वदंति प्रगल्भं पुराणं तमीडे।।
अर्थातः-  जिसे एकाक्षर, विमल, विकल्परहित, त्रिगुणातीत, परंमानंदमय निराकार और प्रणव स्वरूप, वेदगर्भ और पुराण पुरुष कहकर मुनिगण श्रद्धापूर्वक कीर्तन करते हैं, मैं उन ईशानंद गणपति की स्तुती करता हूँ। 

सिद्धी विनायक गंणेश जी आप सबकी मनोकामना पूर्ण करें इसी भावना के साथ गंणेश चतुर्थी की शुभकामनाएं  

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प्रथम पूज्य श्री गंणेश    

मंगल मूर्ती वरदविनायक गणेश

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