Friday, 8 January 2016

“मानव सेवा ही सच्ची ईश्वर सेवा है” स्वामी विवेकानंद



स्वामी विवेकानंद जी कहते थे कि, "जब भी कोई व्यक्ति थोङा अलग सोचता है तो उसके बारे में तीन बातें निश्चित होती हैं- उपहास विरोध और अन्त में स्वीकृति। अतः भारत के युवाओं देश हित और समाज हित के लिये कुछ अच्छा सोचो और अपनी सोच को सकारात्मक विचार के साथ सम्पूर्ण विश्व में फैलाओ। ऐसी शिक्षा अपनाओ जिसका उद्देश्य, सूचनाओं के संकलन मात्र नही अपितु तकनिकी कौशल के साथ तुम्हारा चारित्रिक और वैचारिक ज्ञान भी मजबूत हो। पवित्रता और शक्ति के साथ अपने आदर्श पर दृण रहो, फिर तुम्हारे सामने कैसी भी बाधाएँ क्यों न हों।" 
अतः मित्रों, इसी विश्वास के साथ हम सबको आगे बढना है और अपने भारत की संस्कृति को पुनः गौरवान्वित करना है......

स्वामी विवेकानंद की के और भी संदेश पढने के लिये लिंक पर क्लिक करके पढेंः-----

अपने युवा काल में ही स्वामी जी ने अपनी तेजस्वी वांणी से ये संदेश दिया कि अपना भारत देश महान है। उनकी बातें आज भी युवाओं को प्रेरणा देती है। विवेकानंद जी अपने विचारों के माध्यम से आज भी अमर हैं। युवाओं पर विश्वास करने वाले विवेकानंद जी के जन्मदिन (12 जनवरी) को युवा दिवस के रूप में मनाना हमारी भारतीय संस्कृति की गौरवपूर्ण पहचान है। आगे पढें-  युवा शक्ति

आज देश में धर्म और जाति को लेकर अनेक विवाद विद्यमान हैं। मानवीय संवेदना धार्मिक और जातिय बंधन में इस तरह बंध गई है कि इंसानियत का अस्तित्व कहीं खोता हुआ नज़र आ रहा है। ऐसे में स्वामी विवेकानंद जी के प्रेरणादायी प्रसंग इन जातिय और धार्मिक बंधनो को खोल सकते हैं जिससे इंसानियत पुनः स्वंतत्र वातावरण में पल्लवित हो सकती है। आगे पढें-
स्वामी विवेकानंद जी की मुंशी फैज अलि के साथ हुई धार्मिक चर्चा

बैलूरमठ की जमीन को साफ करने के लिये प्रतिवर्ष कुछ संथाल स्त्री-पुरुष आते थे। स्वामी जी उनके साथ कभी-कभी हँसी-मजाक करते थे, उनके सुख-दुःख की बातें बङे ध्यान से सुनते थे। एक दिन की बात है कि, कुछ विशिष्ट् भद्र पुरुष स्वामी जी से मठ में मिलने आये, उस समय स्वामी जी संथालों के साथ उनकी आपबीती सुन रहे थे। स्वामी जी, सुबोधानंद से बोले कि अब मैं किसी से न मिल सकूँगा आज मैं इनके साथ बङे मजे में हुँ। वास्तव में स्वामी जी, उस दिन संथालो को छोङ कर भद्र महोदय से मिलने नही गये।आगे पढें-  दरिद्रनारायण की सेवा

स्वामी जी के आर्शिवचन सुनने के लिये सुबह 9 बजे से दोपहर तक, हिन्दु मुसलमान दोनो ही जाति के लोग उनके धर्ममत का श्रवणं करते थे। ऐसी ही सभा के दौरान एक व्यक्ति ने प्रश्न किया कि- स्वामी जी, आप गेरुआ वस्त्र क्यों पहनते हैंआगे पढें-
युगप्रवर्तक स्वामी विवेकानंद जी की अलवर यात्रा

1893 में शिकागो में विश्व धर्म सम्मेलन चल रहा था। स्वामी विवेकानंद भी उसमें बोलने के लिए गये हुए थे। 11सितंबर को स्वामी जी का व्याखान होना था। मंच पर ब्लैक बोर्ड पर लिखा हुआ था- हिन्दू धर्म – मुर्दा धर्म। आगे पढें-  शिष्टाचार

युगप्रवर्तक स्वामी विवेकानंद जी काअभिनंदन करें, वंदन करें, उनकी आशाओं और विश्वास पर खरे उतरें, स्वामी जी की शिक्षाओं की ज्योति से हर दिशा रौशन करें।
जय भारत 
धन्यवाद
अनिता शर्मा  




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